लक्षद्वीप के कल्पेनी द्वीप में प्रवाल भित्ति (कोरल रीफ) की खोज
शोधकर्ताओं ने लक्षद्वीप के कल्पेनी द्वीप के उत्तर-पूर्व में एक जीवंत और स्वस्थ प्रवाल भित्ति (कोरल रीफ) की खोज की है। इस रीफ को ‘रिसर्च एंड एनवायरनमेंटल एजुकेशन फाउंडेशन’ (REEF) द्वारा ‘बराना डाइव्स’ के सहयोग से किए गए समुद्री जैव विविधता सर्वेक्षण के दौरान देखा गया था। यह फील्ड गतिविधि के दौरान प्रलेखित 24 रीफों में से एक थी। (Source: DTE)
ऐसे समय में जब दुनिया भर में कई प्रवाल भित्तियाँ गंभीर तनाव में हैं, कल्पेनी द्वीप के पास इस आशाजनक कोरल कवर की खोज उम्मीद जगाती है। यह साबित करता है कि स्वस्थ कोरल पारिस्थितिकी तंत्र अभी भी मौजूद हैं और टिकाऊ प्रबंधन तथा संरक्षण योजना का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
एक प्रवाल भित्ति चट्टानों और पत्थरों के संग्रह जैसी दिख सकती है, लेकिन वास्तव में यह कोरल पॉलिप्स (coral polyps) नामक छोटे अकशेरुकी जीवों की एक कॉलोनी है। कोरल दो प्रकार के होते हैं: कठोर (stony) और नरम (soft), लेकिन कठोर कोरल ही प्रवाल भित्ति का निर्माण करते हैं। कठोर कोरल के कंकाल कैल्शियम कार्बोनेट (चूना पत्थर) से बने होते हैं, जो पॉलिप द्वारा स्रावित होते हैं।
‘समुद्र के वर्षावन’ (rainforests of the oceans) कहे जाने वाली प्रवाल भित्तियाँ लगभग 25 प्रतिशत समुद्री जीवन का आधार हैं। ये एक महत्वपूर्ण और जैव विविधता से भरपूर पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करते हैं, जो मछलियों, अकशेरुकी जीवों और कई अन्य समुद्री जीवों के लिए आश्रय, प्रजनन स्थल और भोजन क्षेत्र प्रदान करते हैं।
रीफ की संरचना तटरेखाओं की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कोरल पृथ्वी पर सबसे पुराने जीवित जीवों में से हैं। उनके पूर्वज 50 करोड़ साल पहले भी मौजूद थे, डायनासोर के आने से भी पहले। कोरल ढांचा लहरों की ऊर्जा को कम करने, तटीय कटाव को रोकने और तलछट निर्माण में मदद करता है, जो लक्षद्वीप जैसे एटोल (atolls) की स्थिरता का समर्थन करता है।
वर्षावनों की तरह, प्रवाल भित्तियाँ भी पोषक तत्वों की कमी वाले पर्यावासों में पनपती हैं। इनमें ऐसी कई प्रजातियाँ होती हैं जिनकी जटिल खाद्य श्रृंखलाएं आवश्यक पोषक तत्वों को बड़ी कुशलता से पुनर्चक्रित (recycle) करती हैं, जिससे ये रीफ किसी भी ऐसी प्रक्रिया के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो जाते हैं जो इस चक्र में बाधा डालती है।


