केरल ने ज्वारीय बाढ़ को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किया
केरल सरकार ने घोषणा की है कि राज्य की विस्तृत तटरेखा के साथ ज्वारीय उत्थान (tidal rise) के कारण आने वाली बाढ़, जो तटीय समुदायों के जीवन और आजीविका को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है, उसे अब ‘राज्य-विशिष्ट आपदा’ (State-specific disaster) माना जाएगा।
मुख्य बिंदु:
- वित्तीय सहायता: ज्वारीय बाढ़ के पीड़ितों को अब राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के तहत वैसी ही वित्तीय सहायता दी जाएगी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के पीड़ितों को मिलती है।
- ऐतिहासिक कदम: केरल देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने ज्वारीय बाढ़ को राज्य-विशिष्ट आपदा घोषित किया है।
ज्वारीय बाढ़ (Tidal Flooding) क्या है?
यह केरल की तटरेखा पर होने वाली एक सामान्य घटना है, जहाँ अरब सागर का जलस्तर थोड़े समय के लिए एक निश्चित सीमा से ऊपर उठ जाता है, जिससे निचले तटीय क्षेत्रों में पानी भर जाता है।
इसकी विशेषताएं:
- नियमितता: चक्रवात से प्रेरित ‘स्टॉर्म सर्ज’ के विपरीत, ज्वारीय बाढ़ दिन में दो बार आती है।
- तीव्रता: यह पूर्णिमा या अमावस्या के दौरान अधिक गंभीर होती है।
- जटिलता: जब मौसम संबंधी स्थितियों के कारण तटीय तूफान और उच्च ज्वार (high tides) एक साथ आते हैं, तो बाढ़ की गहराई और विस्तार दोनों बढ़ जाते हैं।
कानूनी और प्रशासनिक आधार
- SDRF की सीमाएं: सामान्य तौर पर, SDRF केवल चरम घटनाओं (extreme events) से होने वाली बाढ़ को कवर करता है। चूँकि ज्वार एक नियमित प्राकृतिक प्रक्रिया है, इसलिए इसे सामान्य नियमों के तहत आपदा नहीं माना जाता था।
- आपदा प्रबंधन अधिनियम (धारा 2(d)): इस अधिनियम की धारा 2(d) कहती है कि यदि ज्वारीय वृद्धि जैसी प्राकृतिक घटना किसी समुदाय को बुरी तरह प्रभावित करती है और जीवन, आजीविका तथा जीवन स्तर का नुकसान करती है, तो उसे आपदा माना जा सकता है।
प्रभाव: केरल की कम से कम 10% जनसंख्या उच्च-ज्वार की बाढ़ से प्रभावित होती है। यह निर्णय केरल के नौ तटीय जिलों के लिए अत्यंत राहतकारी है, जहाँ स्प्रिंग टाइड्स (spring tides) स्थिति को और भी खराब कर देती हैं।


