खगोलविदों ने ‘इनसाइड-आउट’ ग्रहीय प्रणाली की खोज की

  • असामान्य ग्रहीय प्रणाली: खगोलविदों ने एक ऐसी ग्रहीय प्रणाली देखी है जो वर्तमान ग्रह निर्माण सिद्धांतों को चुनौती देती है। इसमें एक चट्टानी ग्रह अपने गैसीय पड़ोसी ग्रहों की कक्षाओं से भी बाहर स्थित है।
  • अवलोकन: यह खोज यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के Cheops स्पेस टेलिस्कोप द्वारा की गई है।
  • प्रणाली की संरचना: इसमें LHS 1903 नामक एक लाल बौने तारे की परिक्रमा करने वाले चार ग्रह (दो चट्टानी और दो गैसीय) शामिल हैं। यह तारा पृथ्वी से लगभग 117 प्रकाश वर्ष दूर ‘लिंक्स’ (Lynx) नक्षत्र की दिशा में स्थित है।
  • तारे की विशेषताएं: LHS 1903 हमारे सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 50% है और इसकी चमक सूर्य की तुलना में केवल 5% है।
  • ग्रहों का क्रम: सबसे आंतरिक ग्रह चट्टानी है, उसके बाद दो गैसीय ग्रह हैं, और चौथा ग्रह (जिसे सिद्धांत के अनुसार गैसीय होना चाहिए था) भी चट्टानी है।

ग्रह निर्माण का स्थापित सिद्धांत बनाम नई खोज

विशेषतापारंपरिक सिद्धांत (Paradigm)LHS 1903 प्रणाली
तारे के समीपछोटे और चट्टानी ग्रह (गर्मी के कारण गैस/बर्फ का अभाव)पहला ग्रह चट्टानी है (सिद्धांत के अनुरूप)
तारे से दूरविशाल गैसीय ग्रह (ठंडे क्षेत्रों में गैस और बर्फ की प्रचुरता)चौथा और सबसे बाहरी ग्रह चट्टानी है (सिद्धांत के विपरीत)
सौर मंडल का उदाहरणआंतरिक 4 ग्रह चट्टानी, बाहरी 4 ग्रह गैसीयक्रम मिश्रित है (चट्टानी-गैसीय-गैसीय-चट्टानी)

महत्वपूर्ण तथ्य

  • प्रकाश वर्ष: प्रकाश द्वारा एक वर्ष में तय की गई दूरी, जो लगभग 9.5 ट्रिलियन किमी होती है।
  • एक्सोप्लैनेट (Exoplanets): हमारे सौर मंडल से बाहर स्थित ग्रह। 1990 के दशक से अब तक लगभग 6,100 एक्सोप्लैनेट्स का पता लगाया जा चुका है।
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