तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट (TNP)
10 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में बताया कि उनकी सरकार केंद्र के साथ मिलकर उन दो परियोजनाओं पर काम कर रही है, जिन्हें पाकिस्तान की आपत्तियों (सिंधु जल संधि – IWT का हवाला देते हुए) के कारण रोक दिया गया था। इनमें से एक महत्वपूर्ण परियोजना तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट (TNP) है।
परियोजना का विवरण:
- इतिहास और उद्देश्य: “वुलर बैराज” के रूप में भी प्रसिद्ध इस परियोजना की कल्पना 1980 के दशक में की गई थी और 1984 में इस पर काम शुरू हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य झेलम नदी में साल भर पानी का समान प्रवाह बनाए रखना था, ताकि नौकायन (navigation) सुनिश्चित हो सके।
- प्रमुख बाधाएँ: पाकिस्तान की आपत्तियों और 1989 में कश्मीर में उग्रवाद (militancy) शुरू होने के कारण इस पर काम रोक दिया गया था। झेलम उन तीन नदियों में से एक है जो अब निलंबित हो चुकी सिंधु जल संधि (IWT) के दायरे में आती थीं।
- संरचना (Lock-and-Control): इस परियोजना के तहत उत्तरी कश्मीर के सोपोर शहर में वुलर झील और झेलम के संगम पर एक ‘लॉक-एंड-कंट्रोल’ संरचना (barrage) बनाने की योजना थी।
तकनीकी विशेषताएँ:
- आकार: सोपोर के निंगली इलाके में इस बैराज को 135 मीटर लंबा और लगभग 12 मीटर चौड़ा बनाने की योजना थी।
- कार्यप्रणाली: एक ‘लॉक-एंड-कंट्रोल’ बैराज एक ऐसी हाइड्रोलिक संरचना होती है जो नदी नियंत्रण बांध (dam) और ‘नेविगेशन लॉक’ को जोड़ती है। यह ऊपरी हिस्से (upstream) में पानी के स्तर को बनाए रखता है और साथ ही जहाजों या नावों को अलग-अलग जल स्तरों के बीच सुरक्षित रूप से गुजरने में मदद करता है।


