करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (CPI) 2025
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा 10 फरवरी, 2026 को जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (CPI) 2025 की रिपोर्ट वैश्विक स्तर पर शासन और संस्थागत सत्यनिष्ठा की एक चुनौतीपूर्ण तस्वीर पेश करती है।
आपने जो डेटा साझा किया है, वह वैश्विक भ्रष्टाचार की प्रवृत्तियों और उसमें भारत की बदलती स्थिति को समझने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यहाँ रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्षों का संक्षिप्त विश्लेषण दिया गया है:
भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक 2025: मुख्य सांख्यिकी
| श्रेणी | देश / विवरण | स्कोर (0-100) |
| शीर्ष स्थान (Cleanest) | डेनमार्क (रैंक 1) | 89 |
| दूसरा स्थान | फिनलैंड (रैंक 2) | 88 |
| तीसरा स्थान | सिंगापुर (रैंक 3) | 84 |
| भारत की स्थिति | 91वीं रैंक (182 देशों में) | 39 |
| सबसे निचला स्थान | दक्षिण सूडान और सोमालिया | 9 |
| वैश्विक औसत | सभी 182 देशों का औसत | 42 |
भारत का प्रदर्शन: एक सकारात्मक सुधार
भारत के लिए 2025 की रिपोर्ट उत्साहजनक है क्योंकि देश ने अपनी रैंकिंग में 5 स्थानों का सुधार किया है।
- 2024: 96वीं रैंक (स्कोर: 38)
- 2025: 91वीं रैंक (स्कोर: 39)
वैश्विक और क्षेत्रीय रुझान
- लोकतांत्रिक गिरावट: रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अमेरिका (रैंक 29, स्कोर 64) और ब्रिटेन (रैंक 20, स्कोर 70) जैसे स्थापित लोकतंत्रों में भी भ्रष्टाचार के प्रति धारणा खराब हुई है।
- पूर्वी यूरोप और मध्य एशिया: इस क्षेत्र का औसत स्कोर केवल 34 है। यहाँ संस्थागत कमजोरी और नागरिक अधिकारों में कमी भ्रष्टाचार के मुख्य कारण बताए गए हैं।
- खतरे में पत्रकार: रिपोर्ट के अनुसार, भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले 90% पत्रकारों की हत्या उन देशों में हुई जिनका CPI स्कोर 50 से कम है।
CPI क्या मापता है?
यह सूचकांक सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के धारणा स्तर को मापता है। यह 13 स्वतंत्र डेटा स्रोतों (जैसे विश्व बैंक और वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) के आधार पर तैयार किया जाता है।+1
- 100: बहुत साफ (Very Clean)
- 0: अत्यधिक भ्रष्ट (Highly Corrupt)


