लघु वन उपज की खरीद और विपणन
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर लघु वन उपज (Minor Forest Produce – MFP) की सरकारी खरीद में 2023-24 की तुलना में 2024-25 में भारी गिरावट देखी गई है। 5 फरवरी, 2026 को संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 19 राज्यों में की गई MFP की खरीद में 2023-24 से 2024-25 के बीच 92% से अधिक की कमी आई है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022-23 में इन राज्यों में MSP पर कुल खरीद 26,744 मीट्रिक टन (MT) थी, जिसका मूल्य लगभग ₹94.23 करोड़ था। अगले वर्ष 2023-24 में यह खरीद लगभग दोगुनी होकर 51,400 मीट्रिक टन से अधिक हो गई, जिसका मूल्य ₹124.3 करोड़ था। हालांकि, वर्ष 2024-25 के दौरान आंकड़ों ने दिखाया कि केवल 3,920.2 मीट्रिक टन उपज ही खरीदी गई, जिसका मूल्य करीब ₹16.68 करोड़ था।
खरीद में यह गिरावट सभी राज्यों में एक समान नहीं थी। जहाँ मिजोरम, नागालैंड, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में खरीद में वृद्धि दर्ज की गई, वहीं ओडिशा, असम और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में इसमें कमी देखी गई।
प्रमुख विवरण:
- योजना: जनजातीय कार्य मंत्रालय, देश भर के जनजातीय लाभार्थियों के लिए आजीविका सृजन हेतु भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ (TRIFED) के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन’ (PMJVM) योजना लागू करता है।
- कार्यप्रणाली: इस योजना के तहत मंत्रालय लघु वन उपज के लिए MSP अधिसूचित करता है और राज्य सरकारों को अधिसूचित मूल्य पर खरीद के लिए ‘रिवॉल्विंग फंड’ (revolving funds) प्रदान करता है।
- विस्तार: केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्रालय ने MSP खरीद के लिए पात्र MFP की संख्या को 2013-14 के ’10’ से बढ़ाकर अब 87 कर दिया है।
- फंडिंग: खरीदी गई उपज की बिक्री से प्राप्त राशि को राज्य सरकारों द्वारा वापस रिवॉल्विंग फंड में जमा कर दिया जाता है।


