फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA)
भारत सरकार, नगालैंड सरकार और ईस्टर्न नगालैंड पीपल्स ऑर्गनाइजेशन (ENPO) के बीच फ्रंटियर नगालैंड टेरिटोरियल अथॉरिटी (FNTA) के गठन के लिए एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। ENPO नगालैंड के छह पूर्वी जिलों की आठ मान्यता प्राप्त नगा जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाला एक शीर्ष निकाय है।
यहाँ इस समझौते के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
पृष्ठभूमि और भौगोलिक विस्तार
- प्रभावित जिले: यह समझौता नगालैंड के छह जिलों—तुएनसांग, मोन, किफिरे, लोंगलेंग, नोकलाक और शमातोर के लिए एक नई व्यवस्था सुनिश्चित करता है।
- प्रमुख मांग: इन जिलों की आठ जनजातियाँ 2015 से क्षेत्र-विशिष्ट शक्तियों की मांग कर रही थीं। 2022 में गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक के बाद इस समझौते पर काम शुरू हुआ।
समझौते की मुख्य विशेषताएं
- शक्तियों का हस्तांतरण: FNTA को 46 विषयों (Subjects) के संबंध में निर्णय लेने की शक्तियाँ सौंपी जाएंगी।
- प्रशासनिक ढांचा: FNTA के लिए एक मिनी-सचिवालय (Mini-Secretariat) होगा, जिसका नेतृत्व अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे।
- वित्तीय स्वायत्तता: पूर्वी नगालैंड क्षेत्र के लिए विकास परिव्यय (Development Outlay) का बंटवारा जनसंख्या और क्षेत्र के अनुपात में किया जाएगा।
- संवैधानिक सुरक्षा: यह समझौता किसी भी तरह से संविधान के अनुच्छेद 371(A) के प्रावधानों को प्रभावित नहीं करेगा (जो नगालैंड को विशेष दर्जा देता है)।
इस व्यवस्था का महत्व
| लाभ | विवरण |
| त्वरित विकास | वित्तीय स्वायत्तता से बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी आएगी। |
| आर्थिक सशक्तिकरण | संसाधनों के इष्टतम उपयोग से स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। |
| निर्णय लेने की शक्ति | स्थानीय प्रशासन के पास अपने क्षेत्र के लिए बेहतर निर्णय लेने का अधिकार होगा। |


