देशव्यापी ‘प्रवासन सर्वेक्षण’
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), जुलाई 2026 से जून 2027 के दौरान देशव्यापी ‘प्रवासन सर्वेक्षण’ आयोजित करेगा।
सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य
इसका लक्ष्य भारत में प्रवासन के पैटर्न पर व्यापक और अद्यतन डेटा तैयार करना है। राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस सर्वेक्षण में निम्नलिखित पहलुओं को शामिल किया जाएगा:
- प्रवासन की प्रकृति: ग्रामीण-से-शहरी और अंतर-राज्यीय आवाजाही।
- कारण और प्रोफाइल: प्रवासन के पीछे के कारण, वापसी प्रवासन (Return Migration), मौसमी प्रवासन और प्रवासियों का रोजगार प्रोफाइल।
नीति निर्माण में महत्व
इस डेटा का उपयोग नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं द्वारा इन क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप (Targeted Interventions) डिजाइन करने के लिए किया जाएगा:
- शहरी नियोजन और आवास।
- परिवहन बुनियादी ढांचा।
- रोजगार सृजन और कौशल विकास।
- सामाजिक सुरक्षा।
पिछला डेटा: एक तुलनात्मक दृष्टि (PLFS 2020-21)
मौजूदा समय में हमारे पास प्रवासन से संबंधित सबसे हालिया डेटा ‘पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे’ (PLFS) 2020-21 से उपलब्ध है। इसके प्रमुख निष्कर्ष नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट हैं:
| विवरण | सांख्यिकीय आंकड़े (PLFS 2020-21) |
| कुल प्रवासन दर (भारत) | 28.9% |
| पुरुष प्रवासन दर | 10.7% |
| महिला प्रवासन दर | 47.9% |
प्रवासन के प्रमुख कारण (लिंग आधारित)
सर्वेक्षण से पता चलता है कि पुरुषों और महिलाओं के पलायन के कारणों में जमीन-आसमान का अंतर है:
- महिलाएं: प्रवासन का मुख्य कारण विवाह है, जो कुल महिला प्रवासियों का लगभग 86.8% है।
- पुरुष: प्रवासन का सबसे बड़ा कारण रोजगार या बेहतर अवसर की तलाश है, जिसकी हिस्सेदारी 22.8% है।


