पेचोरा (Pechora) मिसाइल प्रणाली

रक्षा मंत्रालय (MoD) ने ‘पेचोरा’ (Pechora) सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली के ओवरहॉल और डिजिटलीकरण के लिए बेंगलुरु स्थित अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (ADTL) के साथ लगभग ₹591.3 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

स्वदेशी तकनीक से नई जान

सोवियत काल में डिजाइन की गई पेचोरा प्रणाली 1970 के दशक से भारतीय वायु सेना (IAF) की सेवा में है। अब इसे पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक बनाया जा रहा है।

  • लक्ष्य: यह अपग्रेड भारत की बहुस्तरीय हवाई रक्षा (Multi-layered Air Defence) को और मजबूत करेगा।
  • महत्व: यह आधुनिक हवाई खतरों से निपटने के लिए घरेलू तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देता है।

तकनीकी विशेषताएं और क्षमता

उन्नत पेचोरा सिस्टम कम से मध्यम ऊंचाई वाले खतरों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और नष्ट करने के लिए आधुनिक उपकरणों का उपयोग करता है:

  • रडार प्रणाली: इसमें 4R90 याटागन (Yatagan) रडार का उपयोग किया गया है, जिसमें पांच पैराबोलिक एंटेना लगे हैं।
  • मिसाइल: यह प्रणाली रडार-निर्देशित V-600 मिसाइलों से लैस है।
  • मारक क्षमता: * डिटेक्शन रेंज: 100 किमी तक।
    • इंटरसेप्शन: 25 किमी की ऊंचाई तक खतरों को नष्ट करने में सक्षम।
    • गति: यह 900 मीटर प्रति सेकंड तक की गति वाले दो लक्ष्यों को एक साथ निशाना बना सकता है।
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