पटना पक्षी अभयारण्य और छारी-ढांड रामसर साइट्स की सूची में शामिल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एटा (उत्तर प्रदेश) के पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) के छारी-ढंड को रामसर साइटों की सूची में शामिल किए जाने का स्वागत किया है।
1. पटना पक्षी अभयारण्य (एटा, उत्तर प्रदेश)
- महत्व: यह उत्तर प्रदेश की 11वीं रामसर साइट बन गई है। तमिलनाडु (20 साइटों के साथ) के बाद उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है।
- विशेषता: 1991 में स्थापित यह अभयारण्य उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी अभयारण्य है, जिसका क्षेत्रफल केवल 1 वर्ग किमी है।
- जैव विविधता: यहाँ पक्षियों की लगभग 300 प्रजातियों के 2,00,000 पक्षी आते हैं।
2. छारी-ढंड संरक्षण रिजर्व (कच्छ, गुजरात)
- अवस्थिति: यह विशाल, शुष्क बन्नी घास के मैदानों और कच्छ के रण के नमकीन दलदल के किनारे स्थित है।
- नाम का अर्थ: ‘छारी’ का अर्थ है खारा और ‘ढंड’ का अर्थ है उथली झील।
- गुजरात में स्थान: यह नल सरोवर, थोल, खिजड़िया और वाधवाना के बाद गुजरात की पांचवीं रामसर साइट है। इसे 2008 में गुजरात का पहला ‘संरक्षण रिजर्व’ घोषित किया गया था।
- विविधता: यहाँ पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं।
रामसर कन्वेंशन क्या है?
रामसर साइटें अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियाँ हैं, जिन्हें 1971 के रामसर कन्वेंशन के तहत जैव विविधता (विशेष रूप से जलपक्षी आवासों) के संरक्षण के लिए नामित किया गया है।
- उद्देश्य: दलदल, फेन और झीलों जैसे क्षेत्रों का टिकाऊ प्रबंधन करना ताकि उनके पारिस्थितिक स्वरूप को बनाए रखा जा सके।
- भारत का जुड़ाव: भारत 1 फरवरी 1982 को इस कन्वेंशन का हस्ताक्षरकर्ता बना था।


