राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 28 जनवरी, 2026 को बजट सत्र के शुभारंभ पर संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बैठक को संबोधित करते हुए सरकार के ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। अपने संबोधन में उन्होंने सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचे, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
राष्ट्रपति के संबोधन के मुख्य बिंदु:
- विकसित भारत @2047: राष्ट्रपति ने अगले 25 वर्षों को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया और 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को दोहराया।
- सामाजिक और आर्थिक सुधार: उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले दशक में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं और ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ के माध्यम से कर सुधार (जैसे ₹12 लाख तक की आय कर-मुक्त) और श्रम कानूनों का सरलीकरण किया गया है।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: आतंकवाद के खिलाफ कड़े रुख का जिक्र करते हुए उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आंतरिक सुरक्षा में सुधारों की सराहना की।
संवैधानिक प्रावधान: राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 86 और 87 राष्ट्रपति के संबोधन (अभिभाषण) से संबंधित हैं:
| अनुच्छेद | विवरण |
| अनुच्छेद 86 | यह राष्ट्रपति को संसद के किसी भी सदन या दोनों सदनों को एक साथ संबोधित (अभिभाषण) करने का अधिकार देता है। हालाँकि, संविधान के लागू होने से लेकर अब तक इस प्रावधान के तहत राष्ट्रपति ने संबोधन नहीं किया है। |
| अनुच्छेद 87 | यह दो विशेष अवसरों पर राष्ट्रपति के अनिवार्य संबोधन का प्रावधान करता है: 1. प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र की शुरुआत में। 2. प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र (बजट सत्र) की शुरुआत में। |


