लद्दाख के हनले में दर्ज की गई लाल रंग की ‘अरोरा’ गतिविधि
19 और 20 जनवरी की रात को लद्दाख के हनले स्थित भारतीय खगोलीय वेधशाला (IAO) के ‘ऑल-स्काई’ कैमरों ने आसमान में गहरे लाल रंग की अरोरा (Auroral activity) गतिविधि को कैद किया। वर्तमान सौर चक्र (Solar Cycle) के दौरान यह छठा अवसर है जब इस तरह का तीव्र अरोरा देखा गया है।
इस घटना के पीछे का विज्ञान
बेंगलुरु स्थित भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (IIA) के अनुसार, हनले में दिखा यह अरोरा एक शक्तिशाली भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storm) का परिणाम था, जो 20 जनवरी को तड़के लगभग 3:30 बजे शुरू हुआ।
- कारण: नासा (NASA) के रिमोट-सेंसिंग अवलोकनों के मुताबिक, यह तूफान 18 जनवरी को सूर्य से निकले एक कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने के कारण उत्पन्न हुआ।
- अरोरा क्या है? जब सूर्य से आने वाले आवेशित कण पृथ्वी के वायुमंडल की गैसों से टकराते हैं, तो आसमान में चमकती हुई रंगीन रोशनी पैदा होती है, जिसे अरोरा कहा जाता है।
हनले: भारत का पहला ‘डार्क स्काई रिजर्व’
लद्दाख का हनले क्षेत्र अब आधिकारिक तौर पर भारत के पहले डार्क स्काई रिजर्व (Dark Sky Reserve) के रूप में संरक्षित है।
- विशेषता: डार्क स्काई रिजर्व एक ऐसा क्षेत्र होता है जहाँ प्रकाश प्रदूषण (Light Pollution) को न्यूनतम रखकर आसमान की स्पष्टता बनाए रखी जाती है।
- स्थान: यह चांगथांग वन्यजीव अभयारण्य के भीतर स्थित है और IIA, लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश और लेह विकास परिषद के सहयोग से प्रबंधित है।
- खगोल विज्ञान के लिए आदर्श: यहाँ ऑक्सीजन और नमी का स्तर बहुत कम है, जबकि पराबैंगनी विकिरण (UV radiation) अधिक है—ये स्थितियां अंतरिक्ष विज्ञान और तारों को देखने (Stargazing) के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं।
वेधशाला की तकनीकी शक्ति
हनले की वेधशाला में कई अत्याधुनिक दूरबीनें (Telescopes) स्थापित हैं:
- ऑप्टिकल टेलिस्कोप: हिमालयन चंद्रा टेलिस्कोप और ग्रोथ (GROWTH) इंडिया टेलिस्कोप।
- चेरेनकोव (Cherenkov) टेलिस्कोप: हाई एल्टीट्यूड गामा-रे टेलिस्कोप एरे और ‘मेस’ (MACE) टेलिस्कोप।
कभी खानाबदोश लोगों का क्षेत्र रहा हनले, आज दुनिया भर के खगोल प्रेमियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनकर उभर रहा है।


