सरकार ने कोकिंग कोल को क्रिटिकल और स्ट्रेटेजिक खनिज के रूप में अधिसूचित किया
भारत सरकार ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत कोकिंग कोल (Coking Coal) को ‘महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिज’ (Critical and Strategic Mineral) के रूप में अधिसूचित किया है।
कोकिंग कोल: अब एक ‘महत्वपूर्ण और रणनीतिक’ खनिज
1. नीतिगत बदलाव और इसके लाभ
कोकिंग कोल को अब अधिनियम के भाग D में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में आने से निम्नलिखित लाभ होंगे:
- त्वरित मंजूरी: खनन परियोजनाओं के लिए अब कम समय में और आसानी से क्लीयरेंस मिल सकेगी।
- व्यापार में सुगमता (Ease of Doing Business): गहरे दबे हुए (Deep-seated) निक्षेपों की खोज और खनन में तेजी आएगी।
- विशेष छूट: महत्वपूर्ण खनिजों के खनन को अब जनसुनवाई (Public Consultation) की आवश्यकताओं से छूट दी गई है। साथ ही, प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) के लिए खराब हो चुकी वन भूमि के उपयोग की अनुमति भी दी गई है।
- निजी क्षेत्र की भागीदारी: इन रियायतों से निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
2. राज्यों का राजस्व सुरक्षित
MMDR अधिनियम की धारा 11D (3) के अनुसार, भले ही इन खनिजों की नीलामी केंद्र सरकार द्वारा की जाए, लेकिन रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम और अन्य वैधानिक भुगतान संबंधित राज्य सरकारों को ही प्राप्त होंगे।
3. भारत में कोकिंग कोल का परिदृश्य
भारत कोकिंग कोल के मामले में संसाधनों से संपन्न है, फिर भी आयात पर निर्भरता एक बड़ी चुनौती है।
- कुल संसाधन: अनुमानित 37.37 बिलियन टन।
- प्रमुख क्षेत्र: सबसे बड़ा भंडार झारखंड में है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में भी इसके भंडार मौजूद हैं।
- आयात की स्थिति: कोकिंग कोल का आयात 2020-21 के 51.20 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 57.58 मिलियन टन हो गया है।
- निर्भरता: वर्तमान में इस्पात क्षेत्र की लगभग 95% कोकिंग कोल की जरूरत आयात के जरिए पूरी की जाती है, जिससे भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाती है।
4. भारत के 30 महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals List)
2023 में खान मंत्रालय ने 30 खनिजों की एक सूची जारी की थी जो भारत की आर्थिक उन्नति और सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। इनमें शामिल हैं:


