PESA रैंकिंग 2024-25
77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री ने वर्ष 2024-25 के लिए PESA रैंकिंग जारी की है। यह रैंकिंग उन 10 राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा और बेहतर प्रशासन को बढ़ावा देने की एक महत्वपूर्ण पहल है जहाँ ‘पेसा’ कानून लागू है।
PESA रैंकिंग 2024-25 के परिणाम
महाराष्ट्र ने PESA के कार्यान्वयन में पहला स्थान हासिल किया है। शीर्ष तीन राज्य इस प्रकार हैं:
- महाराष्ट्र (प्रथम)
- मध्य प्रदेश (द्वितीय)
- हिमाचल प्रदेश (तृतीय)
PESA अधिनियम, 1996 के बारे में
● पूरा नाम: पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996। ● उद्देश्य: अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना ताकि वे अपने भूमि, जल और वन संसाधनों का प्रबंधन स्वयं कर सकें और अपनी परंपराओं एवं रीति-रिवाजों की रक्षा कर सकें। ● महत्व: यह ग्राम सभा-केंद्रित स्वशासन (self-governance) सुनिश्चित करता है।
रैंकिंग की आवश्यकता और प्रक्रिया
- वस्तुनिष्ठता और पारदर्शिता: रैंकिंग का उद्देश्य परस्पर सहमत संकेतकों पर राज्यों के प्रदर्शन को मापकर पारदर्शिता और जवाबदेही लाना है।
- 100-अंकीय संकेतक: इन रैंकिंग के लिए 100 अंकों के संकेतक तय किए गए हैं। ये संकेतक राज्यों को उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करेंगे जहाँ सुधार की आवश्यकता है।
- PESA महोत्सव: इन संकेतकों को औपचारिक रूप से 24 दिसंबर, 2025 को ‘पेसा महोत्सव’ के दौरान जारी किया गया था (इसी दिन 1996 में पेसा कानून लागू हुआ था)।
निष्कर्ष
PESA रैंकिंग केंद्र और राज्यों की उस सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है जो ‘पेसा’ के परिणाम-उन्मुख कार्यान्वयन की ओर केंद्रित है। यह साक्ष्य-आधारित नीतिगत हस्तक्षेपों को बढ़ावा देता है ताकि आदिवासी क्षेत्रों में स्वशासन की जड़ें और मजबूत हो सकें।
मुख्य शब्दावली:
- पांचवीं अनुसूची क्षेत्र (Fifth Schedule Areas): भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत आने वाले आदिवासी बहुल क्षेत्र।
- ग्राम सभा-केंद्रित स्वशासन: निर्णय लेने की प्रक्रिया में गांव के सभी वयस्क सदस्यों की भागीदारी सुनिश्चित करना।


