ICC की विवाद समाधान समिति (DRC)

बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) की विवाद समाधान समिति (DRC) ने उनकी उस अपील पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसमें भारतीय सरजमीं पर टी-20 विश्व कप मैच खेलने के फैसले को चुनौती दी गई थी। तकनीकी कारणों और अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के चलते BCB की यह ‘हताश’ कोशिश विफल होती नजर आ रही है।

DRC के पास अपील सुनने का अधिकार नहीं

ICC के संविधान और ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) के गहन विश्लेषण से यह स्पष्ट होता है कि DRC के पास वैश्विक निकाय के निदेशक मंडल (Board of Directors) द्वारा पारित किसी भी निर्णय के खिलाफ अपील सुनने का कोई अधिकार नहीं है।

नियम क्या कहता है? DRC के नियमों की धारा 1.3 के अनुसार: यह समिति ICC या उसके मेमोरेंडम और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के तहत स्थापित किसी भी निर्णय लेने वाली संस्था के फैसलों के खिलाफ ‘अपील निकाय’ (Appeal Body) के रूप में कार्य नहीं करेगी।

ऐतिहासिक संदर्भ: पाकिस्तान बनाम भारत मामला (2018)

यह पहली बार नहीं है जब किसी बोर्ड की याचिका को तकनीकी आधार पर खारिज किया गया है। ब्रिटिश कानून के तहत काम करने वाली इस समिति ने 2018 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के 70 मिलियन डॉलर के मुआवजे के दावे को भी खारिज कर दिया था।

  • मामला: PCB ने BCCI पर द्विपक्षीय सीरीज न खेलने का आरोप लगाया था।
  • DRC का फैसला: समिति ने स्पष्ट किया था कि जिसे पाकिस्तान “MoU” (सहमति पत्र) समझ रहा था, वह वास्तव में केवल एक “Letter of Intent” (इच्छा पत्र) था, जो BCCI पर बाध्यकारी नहीं था।

समिति की भूमिका और कार्यक्षेत्र

विशेषज्ञों का मानना है कि DRC का प्राथमिक कार्य यह सुनिश्चित करना है कि ICC बोर्ड ने अपने नियमों और कानूनों का सही ढंग से पालन किया है या नहीं। यह किसी नीतिगत निर्णय को बदलने वाली संस्था नहीं है।

निष्कर्ष: चूंकि टी-20 विश्व कप के मैचों के आयोजन स्थल का निर्णय ICC के बोर्ड द्वारा लिया गया है, इसलिए BCB के पास अब कानूनी रूप से इस फैसले को DRC के माध्यम से चुनौती देने का कोई मार्ग शेष नहीं रह गया है।

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