मोनोक्लोनल एंटीबॉडी
दिल्ली उच्च न्यायालय ने हाल ही में ज़ायडस लाइफसाइंसेज (Zydus Lifesciences) को निवोलुमैब (Nivolumab) दवा का बायोसिमिलर संस्करण बनाने और बेचने की अनुमति दे दी है। यह अमेरिकी दवा कंपनी ब्रिस्टल मायर्स स्क्विब (BMS) की एक पेटेंटेड दवा है, जिसका भारत में पेटेंट मई में समाप्त होने वाला है।
यहाँ इस खबर और दवा से जुड़ी तकनीकी जानकारी का आसान भाषा में विवरण दिया गया है:
अदालती फैसला और इसका महत्व
यह फैसला भारतीय दवा निर्माता ज़ायडस के लिए एक बड़ी जीत है। निवोलुमैब कैंसर के इलाज में एक ‘ब्लॉकबस्टर’ दवा मानी जाती है। पेटेंट खत्म होने से पहले ही निर्माण की अनुमति मिलने से अब भारतीय मरीजों को यह जीवन रक्षक दवा सस्ती दरों पर उपलब्ध हो सकेगी।
क्या है निवोलुमैब और यह कैसे काम करती है?
निवोलुमैब एक ‘मोनोक्लोनल एंटीबॉडी’ (Monoclonal Antibody) दवा है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) को कैंसर कोशिकाओं से लड़ने के लिए मजबूत बनाती है।
- इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): इस उपचार पद्धति को इम्यूनोथेरेपी कहा जाता है। यह कीमोथेरेपी से अलग है। जहाँ कीमोथेरेपी कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुँचाती है, वहीं इम्यूनोथेरेपी केवल लक्षित कोशिकाओं (Targeted Cells) पर काम करती है।
- कार्यप्रणाली: यह दवा लैब में तैयार किए गए उन प्रोटीन अणुओं से बनी होती है जो हमारे प्राकृतिक एंटीबॉडी की नकल करते हैं। ये सीधे कैंसर कोशिकाओं के एंटीजन (Antigens) से चिपक जाते हैं और शरीर के इम्यून सिस्टम को उन्हें नष्ट करने का संकेत देते हैं।
मोनोक्लोनल बनाम पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी
| विशेषता | मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) | पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी |
| स्रोत | एक ही बी-सेल (B-cell) के क्लोन से निर्मित। | विभिन्न बी-सेल क्लोन से निर्मित। |
| लक्ष्य | केवल एक विशिष्ट एंटीजन पर वार करती है। | कई अलग-अलग एंटीजन को लक्षित कर सकती है। |
| उपयोग | कैंसर जैसे सटीक उपचार के लिए बेहतरीन। | सामान्य संक्रमणों से लड़ने में मददगार। |


