अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स नासा से सेवानिवृत्त

मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास की सबसे सफल अंतरिक्ष यात्रियों में से एक, सुनीता विलियम्स ने अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ‘नासा’ (NASA) से सेवानिवृत्ति ले ली है। उनका यह शानदार करियर 27 वर्षों तक चला।

भारत से गहरा नाता

सुनीता विलियम्स का जन्म ओहियो के यूक्लिड में हुआ था, लेकिन उनका पैतृक संबंध भारत से है। उनके पिता, जो एक न्यूरोएनाटॉमिस्ट (तंत्रिका विज्ञानी) थे, गुजरात के मेहसाणा जिले के झुलासन गांव के रहने वाले थे और बाद में अमेरिका जाकर बस गए थे।

अंतरिक्ष यात्रा का सफरनामा

सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष करियर उपलब्धियों से भरा रहा है:

  • पहली उड़ान (2006): उन्होंने 9 दिसंबर 2006 को ‘डिस्कवरी’ शटल से अपनी पहली उड़ान भरी थी।
  • आईएसएस की कमान (2012): वर्ष 2012 में उन्होंने 127 दिनों के मिशन के दौरान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की कमान संभाली। वे ISS का नेतृत्व करने वाली चुनिंदा महिलाओं में से एक बनीं। इस दौरान उन्होंने स्टेशन के रेडिएटर की मरम्मत के लिए तीन कठिन ‘स्पेस वॉक’ भी किए।
  • अंतिम मिशन (2024-25): उनका तीसरा और सबसे लंबा मिशन जून 2024 में शुरू हुआ। वे बुच विल्मोर के साथ बोइंग के ‘स्टारलाइनर’ अंतरिक्ष यान से रवाना हुई थीं।

अंतिम मिशन की चुनौतियाँ

उनका आखिरी मिशन मूल रूप से कम समय के लिए था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे बढ़ाकर 9 महीने कर दिया गया। विलियम्स और विल्मोर मार्च 2025 में सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लौटे, जिसके बाद उन्होंने अपनी लंबी और प्रेरक सेवा से अवकाश लेने का निर्णय लिया।

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