बागुरुम्बा द्वौ 2026
असम की राजधानी गुवाहाटी का सरुसजाई स्टेडियम एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक संगम का गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बोडो समुदाय की समृद्ध विरासत और कला के उत्सव ‘बागुरुम्बा द्वौ 2026’ (Bagurumba Dwhou 2026) को संबोधित किया। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता 10,000 से अधिक बोडो कलाकारों द्वारा एक साथ दी गई ‘बागुरुम्बा’ नृत्य की विशाल प्रस्तुति रही।
एक व्यापक राज्यव्यापी भागीदारी
इस भव्य आयोजन में असम के 23 जिलों के 81 विधानसभा क्षेत्रों से आए कलाकारों ने हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम न केवल एक नृत्य प्रदर्शन था, बल्कि बोडो समुदाय की सांस्कृतिक एकता और उनके गौरवशाली इतिहास का प्रदर्शन भी था।
क्या है बागुरुम्बा नृत्य?
बागुरुम्बा बोडो समुदाय का एक पारंपरिक लोक नृत्य है, जो अपनी सुंदरता और सादगी के लिए जाना जाता है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- प्रकृति से प्रेरणा: यह नृत्य प्रकृति से गहराई से प्रेरित है। इसकी कोमल और प्रवाहपूर्ण हरकतें तितलियों, पक्षियों, लहराती पत्तियों और खिलते फूलों की नकल करती हैं।
- कलाकार: पारंपरिक रूप से यह नृत्य युवा बोडो महिलाओं द्वारा किया जाता है, जबकि पुरुष कलाकार वाद्य यंत्रों के साथ संगीतकार के रूप में उनका साथ देते हैं।
- सांस्कृतिक प्रतीक: यह नृत्य शांति, प्रजनन क्षमता (fertility), खुशी और सामूहिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है।
- जुड़ाव: बागुरुम्बा विशेष रूप से बोडो नए साल ‘ब्विसागु’ और ‘डोमासी’ जैसे त्योहारों के दौरान प्रमुखता से किया जाता है।


