पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस की पुष्टि

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में निपाह वायरस (NiV) संक्रमण के मामलों की पुष्टि की है। इस खबर के सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। निपाह एक घातक ‘जूनोटिक’ बीमारी है, जो जानवरों से इंसानों में फैलती है।

संक्रमण के लक्षण और खतरे

विशेषज्ञों के अनुसार, संक्रमित व्यक्तियों में इसके लक्षण मामूली से लेकर अत्यंत गंभीर हो सकते हैं। इसमें बिना किसी बाहरी लक्षण (सबक्लिनिकल) वाले संक्रमण से लेकर सांस की गंभीर बीमारी और जानलेवा एन्सेफलाइटिस (दिमाग में सूजन) शामिल है। यह वायरस न केवल इंसानों बल्कि सूअरों जैसे जानवरों में भी गंभीर बीमारी पैदा करता है, जिससे पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

कैसे फैलता है यह वायरस?

निपाह वायरस के फैलने के मुख्य रूप से तीन तरीके बताए गए हैं:

  1. पशु से इंसान: बीमार सूअरों या संक्रमित जानवरों के ऊतकों (tissues) और स्राव के सीधे संपर्क में आने से।
  2. दूषित भोजन: संक्रमित ‘फ्रूट बैट’ (फल खाने वाले चमगादड़) की लार या मूत्र से दूषित फल या खजूर का कच्चा रस पीने से।
  3. इंसान से इंसान: संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित शारीरिक संपर्क के माध्यम से।

इतिहास और प्राकृतिक स्रोत

इस वायरस की पहचान सबसे पहले 1999 में मलेशिया में हुई थी। वैज्ञानिकों का कहना है कि टेरोपोडिडे परिवार के फ्रूट बैट (विशेषकर टेरोपस प्रजाति) इस वायरस के प्राकृतिक स्रोत हैं। चिंता की बात यह है कि इन चमगादड़ों में बीमारी के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, जिससे इनकी पहचान मुश्किल होती है।

उपचार और वर्तमान स्थिति

वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई विशिष्ट दवा या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इसकी गंभीरता को देखते हुए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ‘अनुसंधान और विकास ब्लूप्रिंट’ के तहत एक ‘प्राथमिकता वाली बीमारी’ (Priority Disease) के रूप में सूचीबद्ध किया है।

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