पफरफिश विषाक्तता
भारत में समुद्री खाद्य पदार्थों (Seafood) की सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। गुजरात में पफरफिश (Pufferfish) के जहर का पहला वैज्ञानिक रूप से सत्यापित (Scientifically Verified) मामला दर्ज किया गया है। स्थानीय स्तर पर टॉडफिश, बैलूनफिश या पटकाफिश के नाम से जानी जाने वाली यह मछली अपने भीतर दुनिया का सबसे घातक जहर समेटे हुए है।
क्या है पफरफिश और क्यों है यह खतरनाक?
पफरफिश ‘टेट्राओडोंटिफोर्मेस’ ऑर्डर से संबंधित है। इसकी सबसे बड़ी पहचान इसका टेट्रोडोटॉक्सिन (TTX) नामक जहर है। विशेषज्ञों के अनुसार:
- अत्यधिक घातक: TTX प्रकृति में पाए जाने वाले सबसे शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन में से एक है, जो सीधा तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर हमला करता है।
- भारत में मौजूदगी: भारतीय जलक्षेत्र में पफरफिश की 32 प्रजातियाँ और 8 जेनेरा पाए जाते हैं। ये सर्वाहारी मछलियाँ पानी की निचली सतह पर रहती हैं।
- इकोसिस्टम का हिस्सा: ताजे पानी की पफरफिश मुख्य रूप से पश्चिमी घाट, गंगा, ब्रह्मपुत्र और महानदी जैसे बेसिनों में पाई जाती हैं। इन्हें स्वस्थ नदी पारिस्थितिकी तंत्र का सूचक (Indicator) माना जाता है।
एशिया में मौतों का सिलसिला, भारत में जागरूकता की कमी
पफरफिश का जहर पूरे एशिया में एक बड़ी समस्या रहा है।
- पड़ोसी देशों का हाल: बांग्लादेश, सिंगापुर और हांगकांग में इस मछली को खाने से कई मौतों के मामले डॉक्यूमेंट किए गए हैं।
- जापान का कड़ा नियम: जापान में इसे ‘फुगु’ कहा जाता है और वहाँ इसे एक स्वादिष्ट व्यंजन माना जाता है। हालांकि, वहां केवल लाइसेंस प्राप्त शेफ को ही इसे पकाने की अनुमति है ताकि जहर को सुरक्षित रूप से निकाला जा सके।
- भारतीय परिदृश्य: भारत में वर्तमान में ताजे पानी की मछलियों के टॉक्सिन (जहर) की निगरानी और जोखिम मूल्यांकन (Risk Assessment) के लिए कोई एकीकृत प्रणाली नहीं है। इसी कमी के कारण आम जनता में इस मछली के जानलेवा खतरों को लेकर जागरूकता का अभाव है।


