BNHS ने लॉन्च किया ‘इंडियन स्किमर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट’

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (BNHS) ने 14 जनवरी, 2026 को आधिकारिक तौर पर ‘इंडियन स्किमर कंजर्वेशन प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य गंगा नदी के तटों पर पाए जाने वाले दुर्लभ और लुप्तप्राय (Endangered) पक्षी प्रजातियों के संरक्षण को व्यवस्थित करना है। यह प्रोजेक्ट नदी पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के समग्र संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

क्यों खास है ‘इंडियन स्किमर’?

इंडियन स्किमर (Rynchops albicollis) अपनी शारीरिक बनावट और शिकार करने के अनूठे तरीके के लिए जाना जाता है:

  • विलक्षण चोंच: इस पक्षी की चोंच चमकीले नारंगी-पीले रंग की होती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी ऊपरी चोंच, निचली चोंच की तुलना में काफी छोटी होती है।
  • शिकार की तकनीक: यह अपनी लंबी निचली चोंच को पानी की सतह पर ‘स्किम’ (छूते हुए) करते हुए उड़ता है और मछलियों को पकड़ता है। इसी कारण इसे ‘स्किमर’ कहा जाता है।
  • इकोसिस्टम का रक्षक: विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रोजेक्ट इस बात का प्रमाण है कि नदी संरक्षण केवल पानी या जलीय जीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पूरे इकोसिस्टम का संतुलन शामिल है।

महाकुंभ 2025 का शुभंकर और वर्तमान स्थिति

इंडियन स्किमर का सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व इस बात से समझा जा सकता है कि इसे महाकुंभ 2025 का शुभंकर (Mascot) चुना गया था। यह पक्षी प्रयागराज में गंगा और यमुना के संगम पर बहुतायत में देखा जाता है।

संकट में अस्तित्व: IUCN रेड लिस्ट में शामिल

हाल के वर्षों में इस पक्षी की आबादी में भारी गिरावट आई है:

  1. लुप्तप्राय श्रेणी: इंडियन स्किमर को अब IUCN रेड लिस्ट में ‘Endangered’ (लुप्तप्राय) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
  2. सीमित भौगोलिक क्षेत्र: पहले यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में पाया जाता था, लेकिन अब यह केवल भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार तक सिमट गया है।
  3. भारत का महत्व: वर्तमान में यह प्रजनन (Breeding) करने वाले पक्षी के रूप में लगभग पूरी तरह से भारत पर ही निर्भर है। पश्चिमी बांग्लादेश में कभी-कभी ही इसका प्रजनन देखा जाता है।

प्रोजेक्ट के मुख्य लक्ष्य

  • गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे स्किमर के प्रजनन स्थलों की सुरक्षा करना।
  • नदी प्रदूषण और मानवीय हस्तक्षेप को कम करना।
  • स्थानीय समुदायों को इस दुर्लभ पक्षी के संरक्षण के प्रति जागरूक करना।
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