10वें सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस

देश रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 14 जनवरी को 10वें सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस (Defence Forces Veterans Day) के मौके पर श्रीलंका में इंडियन पीसकीपिंग फोर्स (IPKF) के साहस और बलिदान को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर दिल्ली कैंट स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय शांति सेना (IPKF) के वीर जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने विशेष रूप से 1987 के ‘ऑपरेशन पवन’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सैनिकों के बलिदान को वह ऐतिहासिक सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।

IPKF और ऑपरेशन पवन: शौर्य की अनकही गाथा

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में श्रीलंका में तैनात रही भारतीय शांति सेना (IPKF) के संघर्षों को याद किया। उन्होंने कहा:

  • असाधारण साहस: 1987 में श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन पवन’ के तहत भारतीय सेना ने विपरीत परिस्थितियों में अदम्य साहस का परिचय दिया।
  • सम्मान में देरी: राजनाथ सिंह ने स्वीकार किया कि इस ऑपरेशन के दौरान सैकड़ों जवानों ने अपनी जान गंवाई और एक हजार से अधिक घायल हुए, लेकिन लंबे समय तक उनके योगदान को वह पहचान नहीं मिली जो अन्य युद्ध नायकों को मिलती है।
  • मोदी सरकार की पहल: उन्होंने रेखांकित किया कि साल 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की श्रीलंका यात्रा के दौरान IPKF मेमोरियल पर श्रद्धांजलि देना एक ऐतिहासिक मोड़ था। अब केंद्र सरकार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) और अन्य स्तरों पर इन वीरों के योगदान को आधिकारिक रूप से मान्यता दे रही है।

क्यों मनाया जाता है 14 जनवरी को ‘वेटरन्स डे’?

सशस्त्र सेना पूर्व सैनिक दिवस हर साल 14 जनवरी को भारतीय सैन्य इतिहास की एक महान हस्ती की याद में मनाया जाता है:

  • फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा: यह दिन भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा की विरासत को समर्पित है।
  • ऐतिहासिक सेवानिवृत्ति: फील्ड मार्शल करिअप्पा 14 जनवरी, 1953 को ही सेना से सेवानिवृत्त हुए थे।
  • विरासत: 1947 के युद्ध में भारतीय सेना को जीत दिलाने वाले करिअप्पा ने सेवा, अनुशासन और अटूट देशभक्ति की जो नींव रखी थी, आज पूरा राष्ट्र उसे नमन करता है।

राष्ट्र निर्माण में पूर्व सैनिकों की भूमिका

समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने पूर्व सैनिकों को ‘राष्ट्रीय चेतना का जीवंत स्तंभ’ बताया। उन्होंने कहा कि वर्दी का रंग भले ही बदल जाए, लेकिन देश सेवा का जज्बा कभी रिटायर नहीं होता। यह दिन सेवारत सैन्य कर्मियों, पूर्व सैनिकों और आम नागरिकों के बीच के बंधन को और मजबूत करने का एक प्रतीक है।

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