अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की 16वीं असेंबली

अबू धाबी (UAE) में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की 16वीं असेंबली में भारत ने अपनी गौरवशाली उपलब्धियों का विवरण पेश किया है। केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने भारत का ‘राष्ट्रीय बयान’ देते हुए दुनिया को बताया कि कैसे भारत एक टिकाऊ और किफायती ऊर्जा भविष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है।

लक्ष्य से पांच साल आगे: एक ऐतिहासिक मील का पत्थर

भारत ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है:

  • 50% का लक्ष्य: भारत ने पेरिस समझौते के तहत निर्धारित अपने ‘राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान’ (NDC) के लक्ष्य को समय से पांच साल पहले (2025 में) ही हासिल कर लिया है।
  • वर्तमान क्षमता: भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत अब गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से आता है।
  • आंकड़े: भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षमता अब 266 GW को पार कर गई है।

भविष्य के महत्वाकांक्षी लक्ष्य

भारत ने केवल पुरानी उपलब्धियों पर संतोष नहीं किया है, बल्कि भविष्य के लिए और भी बड़े लक्ष्य रखे हैं:

  1. 2030 का लक्ष्य: 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली क्षमता हासिल करना।
  2. 2070 का लक्ष्य: नेट ज़ीरो (Net Zero) उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करना।

IRENA: वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन का केंद्र

IRENA एक महत्वपूर्ण अंतर-सरकारी संगठन है जो देशों को स्थायी ऊर्जा भविष्य की ओर बढ़ने में मदद करता है।

  • मुख्यालय: अबू धाबी, संयुक्त अरब अमीरात।
  • सदस्यता: वर्तमान में इसमें 170 सदस्य (169 देश और यूरोपीय संघ) शामिल हैं।
  • भारत की भूमिका: भारत IRENA के संस्थापक सदस्यों में से एक है और नवीकरणीय ऊर्जा की नीतियों और वित्तीय ज्ञान के आदान-प्रदान में सक्रिय भूमिका निभाता है।

16वीं असेंबली का आयोजन

IRENA असेंबली का यह 16वां सत्र 10 से 12 जनवरी 2026 तक आयोजित किया गया, जिसमें विश्व भर के नेताओं ने एक न्यायसंगत और समान वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन (Global Energy Transition) पर चर्चा की।

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