खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने अपनी स्थापना के 125 वर्ष पूरे किये

भारत सरकार के श्रम और रोज़गार मंत्रालय के अधीन खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने 7 जनवरी 2026 को अपनी स्थापना के 125 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का उत्सव धनबाद (झारखंड) स्थित मुख्यालय में आयोजित किया गया, जो देश के खदान मज़दूरों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति सवा सदी की समर्पित सेवा को दर्शाता है।

श्रम सुधार: 29 कानूनों की जगह 4 नई श्रम संहिताएँ

कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद सुश्री करंदलाजे ने भारत के श्रम परिदृश्य में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को मिलाकर उन्हें 4 व्यापक श्रम संहिताओं (Labour Codes) में समाहित किया है।

इन सुधारों के मुख्य उद्देश्य:

  • विकसित भारत का निर्माण: सुव्यवस्थित नियमों के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देना।
  • सामाजिक सुरक्षा: ठेका मज़दूरों (Contractual Workers) सहित सभी श्रमिकों के लिए व्यापक सुरक्षा कवच सुनिश्चित करना।
  • सरलीकरण: जटिल कानूनों को हटाकर पारदर्शिता लाना।

आधुनिकीकरण और भविष्य की राह

DGMS की भूमिका की सराहना करते हुए, मंत्रालय ने खदान सुरक्षा को ‘अगले स्तर’ पर ले जाने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ज़ोर दिया:

  1. तकनीकी समावेश: खदानों में दुर्घटनाओं को कम करने के लिए ड्रोन, एआई और सेंसर जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग।
  2. जागरूकता अभियान: नई श्रम संहिताओं के बारे में मज़दूरों और प्रबंधन को शिक्षित करना।
  3. टिकाऊ खनन: पर्यावरण और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाते हुए खनन उद्योग का स्थायी विकास सुनिश्चित करना।

DGMS: एक नज़र में

  • स्थापना: 1902 में (ब्रिटिश काल के दौरान)।
  • मुख्यालय: धनबाद, झारखंड (भारत की कोयला राजधानी)।
  • मुख्य कार्य: खान अधिनियम के तहत सुरक्षा मानदंडों को लागू करना, तकनीकी निरीक्षण और व्यावसायिक स्वास्थ्य मानकों की निगरानी।
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