मद्रास उच्च न्यायालय ने कार्तिगई दीपम जलाने की अनुमति दी
मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 6 जनवरी, 2026 को मदुरै के पास तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी (Thiruparankundram Hill) पर कार्तिगई दीपम जलाने से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है।
न्यायालय का निर्णय
- कोर्ट ने पहाड़ी पर औपचारिक दीपक जलाने के अनुष्ठान की अनुमति दे दी है।
- हालांकि, सुरक्षा और धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि इस अनुष्ठान में आम जनता को शामिल होने की अनुमति नहीं होगी।
तिरुपरनकुंड्रम पहाड़ी: एक साझा सांस्कृतिक विरासत
यह पहाड़ी न केवल अपनी ऊँचाई (1050 फीट) के लिए, बल्कि अपनी बहु-धार्मिक पहचान के लिए भी जानी जाती है:
- हिंदू धर्म: पहाड़ी के आधार पर प्रसिद्ध अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर स्थित है, जो भगवान मुरुगन के छह निवासों (आरुपदैवेदु) में से पहला है।
- जैन धर्म: पहाड़ी पर कई सदियों पुरानी जैन चट्टानें और गुफाएँ मौजूद हैं। इसी कारण इसे “समनार पहाड़ी” भी कहा जाता है।
- इस्लाम: पहाड़ी के शिखर पर सूफी संत सिक्कंदर बादशाह की दरगाह स्थित है, जिसके कारण इसे “सिक्कंदर पहाड़ी” के नाम से भी पुकारा जाता है।
संरक्षण की स्थिति
यह पूरी पहाड़ी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमों के तहत एक संरक्षित स्मारक है। इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक जटिलता को देखते हुए, अदालत का यह फैसला धार्मिक परंपरा को बनाए रखने और सार्वजनिक व्यवस्था व पुरातात्विक संरचना की सुरक्षा के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास है।


