इंडिया-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA)
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल की हालिया लिकटेंस्टीन यात्रा और इंडिया-EFTA व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के महत्वपूर्ण बिंदु नीचे दिए गए हैं:
पीयूष गोयल की लिकटेंस्टीन यात्रा (7 जनवरी 2026)
- ऐतिहासिक संदर्भ: यह किसी भारतीय कैबिनेट मंत्री की लिकटेंस्टीन की पहली आधिकारिक यात्रा है।
- उद्देश्य: 2026 की यह पहली मंत्रिस्तरीय यात्रा TEPA के कार्यान्वयन में तेजी लाने और भारत को एक स्थिर विनिर्माण आधार के रूप में पेश करने के लिए की गई।
- प्रमुख बैठकें: उन्होंने प्रिंस अलॉयस (Prince Alois) और उप प्रधानमंत्री सबाइन मोनाउनी से मुलाकात की। साथ ही, उन्होंने प्रमुख लिकटेंस्टीन कंपनियों (जैसे हिल्टी कॉर्पोरेशन) को भारत में निवेश के लिए आमंत्रित किया।
इंडिया-EFTA TEPA समझौता
- EFTA देश: इसमें चार विकसित देश शामिल हैं—आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड।
- प्रमुख लक्ष्य: अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित करना और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करना।
- प्रभावी तिथि: यह समझौता 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो चुका है।
बाजार पहुंच (Market Access) और टैरिफ विवरण
| विवरण | EFTA का भारत के लिए ऑफर | भारत का EFTA के लिए ऑफर |
| कवरेज | 100% गैर-कृषि उत्पाद और प्रसंस्कृत कृषि उत्पाद (PAP) | 82.7% टैरिफ लाइनें (EFTA के कुल निर्यात का 95.3%) |
| प्रमुख निर्यात | मशीनरी, फार्मा, रसायन और कपड़े | सोना (80% से अधिक आयात) |
| शुल्क रियायत | भारतीय निर्यात पर टैरिफ की महत्वपूर्ण कटौती | सोने पर प्रभावी शुल्क में कोई बदलाव नहीं |
महत्व
- मेक इन इंडिया: यह समझौता भारत की विनिर्माण क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।
- सेवा क्षेत्र: यह पेशेवर सेवाओं (जैसे नर्सिंग, आर्किटेक्चर और अकाउंटेंसी) के लिए ‘पारस्परिक मान्यता समझौते’ (MRAs) के माध्यम से मोबिलिटी को आसान बनाता है।
- बौद्धिक संपदा (IPR): यह भारत के जेनेरिक दवा उद्योग की सुरक्षा करते हुए वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूत IPR ढांचा प्रदान करता है।


