भू-राजनीतिक तनाव के बीच OPEC+ उत्पादन लक्ष्यों पर सहमत
वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाज़ारों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, OPEC+ ने तेल उत्पादन के मौजूदा स्तरों को स्थिर बनाए रखने के लिए सैद्धांतिक रूप से अपनी सहमति दे दी है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब सदस्य देशों के बीच राजनीतिक तनाव और वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितता चरम पर है।
उत्पादन वृद्धि की योजना
इस समझौते में शामिल आठ प्रमुख देश—सऊदी अरब, रूस, संयुक्त अरब अमीरात, कजाकिस्तान, कुवैत, इराक, अल्जीरिया और ओमान—दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 50% हिस्सा नियंत्रित करते हैं।
- लक्ष्य: इन देशों ने अप्रैल और दिसंबर 2025 के बीच उत्पादन क्षमता को लगभग 2.9 मिलियन बैरल प्रति दिन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
OPEC से OPEC+ तक का सफर
1. OPEC की स्थापना (1960): पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) का गठन सितंबर 1960 में बगदाद में हुआ था। इसके संस्थापक सदस्य इराक, ईरान, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला थे। वर्तमान में इस प्रभावशाली समूह में 13 सदस्य देश शामिल हैं।
2. OPEC+ का उदय (2016): 2016 में जब अमेरिकी शेल तेल (Shale Oil) के बढ़ते उत्पादन के कारण वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें तेजी से गिरीं, तब OPEC ने अपनी बाजार शक्ति बनाए रखने के लिए 10 अन्य गैर-OPEC उत्पादक देशों के साथ हाथ मिलाया। इसे ही आज OPEC+ के नाम से जाना जाता है।
OPEC+ में शामिल 10 गैर-OPEC देश:
- रूस, अजरबैजान, कजाकिस्तान, बहरीन, ब्रुनेई, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, दक्षिण सूडान और सूडान।
रणनीतिक महत्व
OPEC+ का यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को विनियमित करने और कच्चे तेल की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन में स्थिरता बनाए रखने से वैश्विक मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।


