स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण जहाज ICGS ‘समुद्र प्रताप’ का जलावतरण
भारत की तटीय सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने आज गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) में भारतीय तटरक्षक जहाज (ICGS) ‘समुद्र प्रताप’ को राष्ट्र की सेवा में समर्पित किया। यह जहाज ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
‘समुद्र प्रताप’: मुख्य विशेषताएं और स्वदेशी शक्ति
यह जहाज न केवल भारतीय तटरक्षक बल (ICG) के बेड़े का सबसे बड़ा जहाज है, बल्कि यह पूरी तरह से भारत में डिज़ाइन किया गया पहला प्रदूषण नियंत्रण जहाज (PCV) भी है।
- स्वदेशी गौरव: इस पोत में 60% से अधिक उपकरण स्वदेशी हैं।
- अत्याधुनिक क्षमताएं: जहाज का मुख्य उद्देश्य समुद्री तेल रिसाव (Oil Spills) को नियंत्रित करना, आग बुझाना और पर्यावरण की रक्षा करना है।
- शक्तिशाली इंजन: यह दो 7,500 kW डीजल इंजनों द्वारा संचालित है, जो स्वदेशी गियरबॉक्स और कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर के साथ इसे बेहतरीन गतिशीलता प्रदान करते हैं।
जहाज का तकनीकी विवरण:
| विशेषता | विवरण |
| डिस्प्लेसमेंट | 4,170 टन |
| लंबाई | 114.5 मीटर |
| अधिकतम गति | 22 समुद्री मील (Knots) से अधिक |
| सहनशक्ति (Endurance) | 6,000 नॉटिकल मील |
रणनीतिक महत्व
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर कहा कि ‘समुद्र प्रताप’ (जिसका अर्थ है ‘समुद्र की शान’) सुरक्षित और स्वच्छ समुद्र सुनिश्चित करने के हमारे संकल्प को दर्शाता है। यह जहाज न केवल समुद्री सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


