‘मुनरो डॉक्ट्रिन से डॉन-रो डॉक्ट्रिन’: पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभुत्व की वापसी

वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार-ए-लागो में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दुनिया को अपनी नई विदेश नीति ‘डॉन-रो डॉक्ट्रिन’ (Don-roe Doctrine) से रूबरू कराया। ट्रंप ने मादुरो के खिलाफ किए गए सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व’ को अमेरिका की 200 साल पुरानी नीति का आधुनिक विस्तार बताया है।


मुनरो से ‘डॉन-रो’ तक का सफर: क्या है यह नया सिद्धांत?

राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि उनकी नीति 1823 की प्रसिद्ध ‘मुनरो डॉक्ट्रिन’ का ही एक उन्नत संस्करण है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “मुनरो डॉक्ट्रिन एक बड़ी बात थी, लेकिन हमने इसे बहुत पीछे छोड़ दिया है। अब इसे डॉन-रो डॉक्ट्रिन कहा जाना चाहिए।”

इस नए सिद्धांत के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • अमेरिकी प्रभुत्व की बहाली: पश्चिमी गोलार्ध (उत्तर और दक्षिण अमेरिका) को फिर से अमेरिकी प्रभाव क्षेत्र में पूरी तरह सुरक्षित करना।
  • बाहरी शक्तियों का निष्कासन: रूस, चीन और ईरान जैसी गैर-हेमिस्फेरिक शक्तियों की इस क्षेत्र में मौजूदगी को रोकना।
  • नार्को-टेररिज्म के खिलाफ युद्ध: ड्रग तस्करी में शामिल नेताओं को अमेरिकी कानून के दायरे में लाना।
  • संसाधनों पर नियंत्रण: वेनेजुएला के तेल बुनियादी ढांचे को अमेरिकी कंपनियों के माध्यम से पुनर्जीवित करना।
ऐतिहासिक संदर्भ: मुनरो डॉक्ट्रिन और रूजवेल्ट कोरोलरी

1823 में राष्ट्रपति जेम्स मुनरो ने इस नीति की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य यूरोपीय शक्तियों को अमेरिकी महाद्वीपों में उपनिवेशवाद बढ़ाने से रोकना था। समय के साथ यह अमेरिकी विदेश नीति का आधार स्तंभ बन गई।

1904 में, राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट ने “रूजवेल्ट कोरोलरी” को जोड़ा, जिसने अमेरिका को लातिन अमेरिकी देशों में “गलत काम” होने पर सैन्य हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया। अब, व्हाइट हाउस ने “ट्रंप कोरोलरी” पेश किया है, जो किसी देश के प्रमुख को गिरफ्तार करने और वहां “प्रशासन चलाने” तक का विस्तार देता है।

‘ट्रंप कोरोलरी’ और वेनेजुएला का भविष्य

प्रशासन की नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के तहत, अमेरिका अब केवल प्रतीकात्मक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि पड़ोसी देश (जैसे कोलंबिया या क्यूबा) अमेरिकी हितों या सुरक्षा के खिलाफ काम करते हैं, तो उनके खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई की जा सकती है।

व्हाइट हाउस का मानना है कि यह दृष्टिकोण “अमेरिका के पिछवाड़े” (Backyard) को सुरक्षित करने और अमेरिकी सीमाओं पर नशीले पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए आवश्यक है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और कुछ नीति निर्माताओं ने इसे अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसकी आलोचना भी शुरू कर दी है।

error: Content is protected !!