असम में ‘उदासीन भक्तों’ को मिलेगी ₹1,500 की मासिक वित्तीय सहायता

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 2 जनवरी, 2026 को राज्य के ‘उदासीन भक्तों’ (अविवाहित संतों) के लिए एक विशेष वित्तीय सहायता योजना की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य असम की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संजोने वाले ब्रह्मचारी वैष्णव संतों को आर्थिक संबल प्रदान करना है।


योजना की मुख्य विशेषताएं
  • वित्तीय मदद: राज्य भर के विभिन्न ‘सत्रों’ (मठों) से जुड़े ब्रह्मचारी वैष्णव संतों को हर महीने 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
  • लाभार्थी: मुख्यमंत्री द्वारा दी गई जिलेवार जानकारी के अनुसार, इस पहल से कुल 620 उदासीन भक्तों को सीधा लाभ मिलेगा।
क्या हैं ‘सत्र’ और ‘उदासीन भक्त’?

असमिया नव-वैष्णव परंपरा में इन शब्दों का विशेष महत्व है:

  • सत्र (Sattras): ये मठ जैसे संस्थान होते हैं जो असम में धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में कार्य करते हैं। इनकी स्थापना महान संत श्रीमंत शंकरदेव और उनके शिष्यों द्वारा की गई थी।
  • भकत (Bhaktas): सत्रों में प्रार्थना और धार्मिक गतिविधियों के लिए एकत्र होने वाले भक्तों को ‘भकत’ कहा जाता है।
  • उदासीन सत्र: वे सत्र जहाँ भक्त ब्रह्मचारी जीवन (अविवाहित रहकर) जीते हैं, उन्हें ‘उदासीन सत्र’ कहा जाता है।
माजुली: सत्रों की पावन भूमि

असम में माजुली (दुनिया का सबसे बड़ा नदी द्वीप) असमिया नव-वैष्णववाद का मुख्य केंद्र है। इसे ‘सत्रों की भूमि’ के रूप में जाना जाता है, जहाँ आज भी सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं जीवंत हैं।

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