तक्षशिला के भीर टीला में मिली प्राचीन सभ्यता की दुर्लभ झलक
पाकिस्तानी पुरातत्वविदों को यूनेस्को (UNESCO) विश्व धरोहर स्थल तक्षशिला के पास चल रही खुदाई के दौरान एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। विशेषज्ञों को यहाँ दुर्लभ सजावटी पत्थर और प्राचीन सिक्के मिले हैं, जो इस क्षेत्र की सबसे पुरानी शहरी बस्ती के रहस्यों से पर्दा उठाते हैं।
भीर टीला (Bhir Mound) पर हुई महत्वपूर्ण खोज
यह खोज प्राचीन भीर टीला स्थल पर की गई है, जहाँ विशेषज्ञों ने 6वीं सदी ईसा पूर्व के सजावटी पत्थर और दूसरी सदी ईस्वी के दुर्लभ सिक्के बरामद किए हैं। भीर टीला को तक्षशिला की सबसे पुरानी शहरी बस्ती माना जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इन खोजों ने प्राचीन गांधार क्षेत्र के इतिहास और विकासक्रम को समझने में नई दिशा प्रदान की है।
सम्राट वासुदेव के काल के सिक्के
खुदाई में कुषाण वंश के दुर्लभ कांस्य सिक्के मिले हैं। शोधकर्ताओं ने पुष्टि की है कि इन सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की तस्वीर अंकित है। इतिहासकारों के अनुसार, वासुदेव को इस क्षेत्र पर शासन करने वाले अंतिम ‘महान कुषाण शासकों’ में से एक माना जाता है।
- सिक्कों की विशेषता: सिक्कों के एक तरफ सम्राट वासुदेव की आकृति है, जबकि दूसरी तरफ एक देवी की तस्वीर बनी हुई है।
- ये सिक्के कुषाण काल की समृद्ध चित्रकला और बहुभाषी शिलालेखों का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हैं।
कुषाण शासन का स्वर्ण युग
यह नवीनतम खोज इस बात की पुष्टि करती है कि पहली और तीसरी सदी ईस्वी के बीच कुषाण शासन के दौरान तक्षशिला अपने राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव के चरम पर था। कुषाण सिक्के अपनी सांस्कृतिक विविधता के लिए प्रसिद्ध हैं, जिन पर मध्य एशियाई पोशाक में शासकों के साथ-साथ शिव, बुद्ध, नाना, हेलिओस और मित्र जैसे विभिन्न देवताओं को दर्शाया गया है।
प्राचीन व्यापारिक संबंधों के मिले सुराग
सिक्कों के अलावा, खुदाई स्थल से गहरे नीले लैपिस लाजुली (Lapis Lazuli) के टुकड़े भी मिले हैं। यह एक मेटामॉर्फिक सजावटी पत्थर है।
- महत्व: लैपिस लाजुली की खोज प्राचीन ‘सप्लाई चेन’ या आपूर्ति श्रृंखलाओं के बारे में महत्वपूर्ण सुराग देती है, जिससे पता चलता है कि उस समय के लोगों के व्यापारिक संबंध दूर-दराज के क्षेत्रों तक फैले हुए थे।


