अबू धाबी में दी गई दुनिया की पहली ‘ITVISMA’ जीन थेरेपी
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ‘प्रेसिजन मेडिसिन’ के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। अबू धाबी के शेख खलीफा मेडिकल सिटी (SKMC) ने स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) के इलाज के लिए दुनिया की पहली एक बार दी जाने वाली (one-time) जीन थेरेपी, ITVISMA प्रदान करने वाला पहला अस्पताल बनकर इतिहास रच दिया है।
अमेरिका के बाद UAE बना दूसरा देश
यह क्रांतिकारी इलाज 28 दिसंबर, 2025 को अबू धाबी के स्वास्थ्य विभाग की सीधी देखरेख में दिया गया। उल्लेखनीय है कि UAE की रेगुलेटरी अथॉरिटी ने 25 नवंबर को इसे अपनी मंजूरी दी थी। इसके साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात अमेरिका के बाद इस अत्याधुनिक थेरेपी को मंजूरी देने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है।
कैसे काम करती है ITVISMA थेरेपी?
दिग्गज दवा कंपनी नोवार्टिस (Novartis) द्वारा विकसित यह थेरेपी सीधे बीमारी की जड़ पर हमला करती है:
- दोषपूर्ण जीन को बदलना: यह शरीर में खराब SMN1 जीन को एक कार्यशील जीन से बदल देती है।
- प्रोटीन उत्पादन: SMN1 जीन शरीर को ‘सर्वाइवल मोटर न्यूरॉन’ (SMN) प्रोटीन बनाने के निर्देश देता है। इस थेरेपी के बाद शरीर स्वयं इस प्रोटीन का उत्पादन करने में सक्षम हो जाता है।
- न्यूरोनल सुरक्षा: यह प्रोटीन मांसपेशियों के नियंत्रण के लिए जिम्मेदार न्यूरॉन्स को जीवित रखने के लिए अनिवार्य है।
अब वयस्कों का इलाज भी संभव
मौजूदा उपचार विकल्पों की तुलना में ITVISMA की सबसे बड़ी विशेषता इसका दायरा है:
- उम्र का बंधन नहीं: पहले की थेरेपी मुख्य रूप से केवल शिशुओं के लिए उपलब्ध थीं, लेकिन ITVISMA को दो साल और उससे अधिक उम्र के मरीजों (वयस्कों सहित) के लिए मंजूर किया गया है।
- एकल खुराक: यह एक ‘सिंगल-डोज़’ थेरेपी है, जिससे मरीजों को बार-बार अस्पताल जाने या दवा लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
क्या है स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA)?
स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी एक दुर्लभ और तेजी से बढ़ने वाला न्यूरोमस्कुलर डिसऑर्डर है। यह शरीर में मांसपेशियों की गंभीर कमजोरी का कारण बनता है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह मांसपेशियों को पूरी तरह बेकार कर सकता है और सांस लेने जैसी समस्याओं के कारण जानलेवा जटिलताएं पैदा कर सकता है।


