राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार 2025’ प्रदान किए
भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने 26 दिसंबर, 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में देश के होनहार बच्चों को ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार’ (PMRBP) से सम्मानित किया। इस वर्ष यह प्रतिष्ठित पुरस्कार 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 20 बच्चों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए दिया गया है।
वीरता और राष्ट्र निर्माण का संगम
पुरस्कार वितरण के अवसर पर राष्ट्रपति ने ‘वीर बाल दिवस’ के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लगभग 320 वर्ष पूर्व गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादों ने सत्य और न्याय की रक्षा के लिए जो बलिदान दिया, वह आज के युवाओं के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि साहिबजादों की वीरता का सम्मान न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर किया जाता है।
पुरस्कार की प्रमुख श्रेणियाँ और चयन प्रक्रिया
प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (PMRBP) उन बच्चों को दिया जाता है जो 5 से 18 वर्ष की आयु के बीच असाधारण कार्य करते हैं।
मुख्य श्रेणियाँ:
- वीरता (Bravery)
- सामाजिक सेवा (Social Service)
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Tech)
- कला एवं संस्कृति (Art & Culture)
- खेल (Sports)
- पर्यावरण (Environment)
चयन के कड़े मानक:
- पात्रता: 5 से 18 वर्ष की आयु के भारतीय नागरिक।
- समय सीमा: उपलब्धि आवेदन की अंतिम तिथि से 2 वर्ष पहले की होनी चाहिए।
- चयन समिति: महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) के सचिव की अध्यक्षता में विशेषज्ञों की समिति विजेताओं का चयन करती है।
- पुरस्कार स्वरूप: प्रत्येक विजेता को एक पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
वीर बाल दिवस: साहस और बलिदान की गाथा
आज का दिन (26 दिसंबर) देश भर में ‘वीर बाल दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। यह दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के दो छोटे पुत्रों, साहिबजादा ज़ोरावर सिंह जी और साहिबजादा फतेह सिंह जी की शहादत को समर्पित है।
- ऐतिहासिक संदर्भ: 26 दिसंबर, 1704 को सरहिंद में इन दो वीर नायकों को ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन से इनकार करने पर जीवित दीवारों में चुनवा दिया गया था।
- उद्देश्य: इस दिवस का उद्देश्य नई पीढ़ी में अनुकरणीय साहस, आत्म-सम्मान और राष्ट्र के प्रति बलिदान की भावना पैदा करना है।


