लैंटाना कैमारा-बदतर इनवेसिव प्रजाति
एक समय में बगीचों की शोभा बढ़ाने वाला ‘लैंटाना कैमारा’ (Lantana Camara) आज दुनिया के लिए सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा बन चुका है। मध्य और दक्षिण अमेरिका की यह सुंदर झाड़ी अब एशिया, अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के जंगलों और खेतों के लिए “कैंसर” की तरह फैल रही है।
सुंदरता के पीछे छिपी ‘सुपरपावर्स’
वैज्ञानिकों के अनुसार, लैंटाना की सफलता के पीछे इसकी अद्भुत लेकिन विनाशकारी क्षमताएं हैं:
- जैविक युद्ध: यह पौधा मिट्टी में ऐसे रसायन छोड़ता है जो आसपास की अन्य देशी वनस्पतियों को पनपने नहीं देते।
- अत्यधिक सहनशक्ति: इसकी जड़ें पानी की तलाश में गहराई तक जाती हैं और पत्तियों पर मौजूद रेज़िन की परत इसे भीषण गर्मी और सूखे में भी जीवित रखती है।
- जहरीला प्रभाव: इसके पत्ते, फूल और बेरियां जानवरों के लिए जहरीली होती हैं, जिससे शाकाहारी जीव इसे नहीं खाते।
खोजकर्ताओं की गलती और वैश्विक प्रसार
लैंटाना का सफर 17वीं सदी में शुरू हुआ जब यूरोपीय खोजकर्ता इसे एक सजावटी पौधे के रूप में यूरोप ले गए। 19वीं सदी तक, यह बगीचों की सीमाओं को लांघकर प्राकृतिक आवासों में फैल गया। पक्षी, कीड़े और बंदर इसके बीजों को लंबी दूरी तक फैलाने में मदद करते हैं, जिससे यह देखते ही देखते लाखों हेक्टेयर जमीन पर कब्जा कर चुका है।
दुनिया की सबसे खराब प्रजातियों में शामिल
इसकी आक्रामकता को देखते हुए, दिसंबर 2000 में ‘इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर’ (IUCN) ने इसे दुनिया की बदतर इनवेसिव (आक्रामक) प्रजातियों में से एक घोषित कर दिया था। एक बार जब यह किसी जमीन पर पैर जमा लेता है, तो इसे जड़ से खत्म करना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी:
लैंटाना न केवल जैव विविधता को नष्ट कर रहा है, बल्कि यह कृषि भूमि को भी अनुपयोगी बना रहा है, जिससे भविष्य में खाद्य सुरक्षा और वन्यजीवों के आवास पर बड़ा संकट आ सकता है।


