सिक्किम में मिली ‘स्प्रिंगटेल्स’ की नई प्रजाति ‘नीलस सिक्किमेंसिस’ की खोज
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के वैज्ञानिकों ने हिमालयी राज्य सिक्किम में एक महत्वपूर्ण जैविक खोज की है। वैज्ञानिकों को सिक्किम की ऊंची पहाड़ियों की मिट्टी में कोलेम्बोला (Collembola) की एक नई प्रजाति मिली है, जिसे आम बोलचाल की भाषा में ‘स्प्रिंगटेल्स’ कहा जाता है।
खोज का विवरण और नामकरण
इस नई खोजी गई प्रजाति का नाम राज्य के नाम पर ‘नीलस सिक्किमेंसिस’ (Neelus sikkimensis) रखा गया है। यह खोज 1 दिसंबर को प्रतिष्ठित ‘जर्नल ऑफ द एंटोमोलॉजिकल रिसर्च सोसाइटी’ में प्रकाशित हुई थी।
वैज्ञानिक दृष्टि से यह खोज इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह भारत में ‘नीलस’ (Neelus) जीनस की पहली रिकॉर्डेड मौजूदगी है। इस नई खोज के साथ ही अब दुनिया भर में नीलस प्रजातियों की कुल संख्या बढ़कर आठ हो गई है।
क्यों खास हैं स्प्रिंगटेल्स?
भले ही ये जीव आकार में बेहद सूक्ष्म होते हैं, लेकिन पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए इनका योगदान अतुलनीय है:
- मिट्टी का स्वास्थ्य: ये मिट्टी में पोषक तत्वों के चक्र (Nutrient Cycling) को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- सफाई कर्मी: स्प्रिंगटेल्स फफूंदी (Mold), फंगस और सड़ने वाले कार्बनिक पदार्थों को खाते हैं, जिससे पर्यावरण प्राकृतिक रूप से साफ रहता है।
- टेरारियम के रक्षक: बागवानी और बंद टेरारियम के शौकीनों के लिए ये छोटे जीव वरदान की तरह हैं। ये गंदगी को हटाकर काई (Moss) और पौधों के पनपने के लिए एक आदर्श संतुलित माहौल तैयार करते हैं।


