इंग्लैंड ने 2025 को “ईयर ऑफ द ब्लूमिंग ऑक्टोपस” घोषित किया
इंग्लैंड के ‘वाइल्डलाइफ ट्रस्ट्स’ ने साल 2025 को आधिकारिक तौर पर “ईयर ऑफ द ब्लूमिंग ऑक्टोपस” (Year of the Blooming Octopus) घोषित किया है। यह निर्णय देश के दक्षिणी तटों पर अकशेरुकी जीवों (invertebrates), विशेषकर ऑक्टोपस की संख्या में हुई रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी के बाद लिया गया है।
दक्षिणी तटों पर ऑक्टोपस का जमावड़ा
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑक्टोपस की सबसे अधिक संख्या इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर, कॉर्नवाल के पेनज़ेंस (Penzance) से लेकर दक्षिण डेवोन (South Devon) तक देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 की शुरुआत में रही हल्की सर्दी और उसके बाद असाधारण रूप से गर्म वसंत ऋतु ने इन जीवों के पनपने के लिए आदर्श स्थिति पैदा की।
वैश्विक स्तर पर बढ़ती आबादी
यह उछाल केवल इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। वर्ष 2019 के एक अध्ययन से पता चला है कि ऑक्टोपस का वैश्विक शिकार, जो 1980 में लगभग 1.79 लाख टन था, वह 2014 तक बढ़कर 3.55 लाख टन से अधिक हो गया। यह आंकड़ा इस समुद्री जीव की लगातार बढ़ती वैश्विक आबादी की पुष्टि करता है।
असाधारण बुद्धि और शारीरिक संरचना
ऑक्टोपस को समुद्र के सबसे बुद्धिमान जीवों में गिना जाता है। उनकी प्रमुख विशेषताएँ और क्षमताएँ निम्नलिखित हैं:
- समस्या-समाधान: वे जार के ढक्कन खोलने और जटिल गांठें सुलझाने में माहिर होते हैं।
- छलावरण (Camouflage): वे शिकारियों से बचने या शिकार करने के लिए रंग और रूप बदलने में सक्षम हैं।
- संरचना: उनके पास एक गोल शरीर, उभरी हुई आँखें और आठ लंबी भुजाएँ होती हैं। हालांकि वे सभी महासागरों में पाए जाते हैं, लेकिन गर्म और उष्णकटिबंधीय पानी उनका पसंदीदा आवास है।
तापमान और भ्रूण विकास का सीधा संबंध
‘साइंस एडवांसेज’ जर्नल (2023) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, बढ़ता तापमान ऑक्टोपस के विकास को गति देता है:
- 11°C तापमान पर: ऑक्टोपस के अंडे से बच्चा निकलने में 2 साल से भी कम समय लगता है।
- 1.6°C तापमान पर (गहरा समुद्र): इसी प्रक्रिया में साढ़े चार साल तक का समय लग सकता है। चूंकि ऑक्टोपस ‘ठंडे खून’ (Cold-blooded) वाले जीव हैं, इसलिए समुद्र के बढ़ते तापमान ने उनके प्रजनन और विकास की दर को तेज कर दिया है।
पारिस्थितिक तंत्र और आजीविका पर संभावित संकट
ऑक्टोपस एक ‘पेटू शिकारी’ है, जिसे अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए रोजाना अपने वजन का तीन गुना भोजन चाहिए होता है। उनकी बढ़ती संख्या से समुद्री खाद्य श्रृंखला में असंतुलन पैदा होने का खतरा बढ़ गया है:
- शिकार पर दबाव: ऑक्टोपस मुख्य रूप से केकड़ों, स्कैलप और लॉबस्टर को खाते हैं। इनकी भारी खपत से इन प्रजातियों की संख्या कम हो सकती है।
- मछुआरों को नुकसान: जो मछुआरे केकड़ों और लॉबस्टर के व्यापार पर निर्भर हैं, उनकी आजीविका पर इस “ऑक्टोपस ब्लूम” का गंभीर असर पड़ सकता है।


