WHO ने इबोला बुंडिब्युग्यो वायरस के लिए पहले डायग्नोस्टिक टेस्ट को ‘इमरजेंसी यूज़ लिस्टिंग’ में शामिल किया

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बुंडीबुग्यो वायरस (Bundibugyo virus: BDBV) के पहले मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट (molecular diagnostic test) को अपनी आपातकालीन उपयोग सूची (Emergency Use Listing – EUL) में शामिल किया है।  

  • सटीक और त्वरित पहचान: यह टेस्ट खून के नमूनों (blood samples) में वायरस की अनुवांशिक सामग्री (genetic material) की पहचान करके संक्रमण की पुष्टि तेजी से और बिल्कुल सटीक तरीके से करता है।
  • गुणवत्ता और मानकों की जांच: WHO की EUL प्रक्रिया उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जरूरी स्वास्थ्य उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रदर्शन का आकलन करती है। साथ ही यह सुनिश्चित करती है कि वे न्यूनतम अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करें और निम्न व मध्यम आय वाले देशों की जरूरतों के अनुकूल हों।
  • अंतरराष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा: 17 मई 2026 को WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ द कांगो (DRC) और युगांडा में बुंडीबुग्यो वायरस के कारण फैले इबोला संकट को देखते हुए इसे ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ (PHEIC) घोषित किया था।

बुंडीबुग्यो वायरस के बारे में 

  • एक गंभीर और जानलेवा बीमारी: बुंडीबुग्यो वायरस रोग एक गंभीर और अक्सर जानलेवा बीमारी है। BDBV उन तीन इबोला वायरस प्रजातियों में से एक है जो इंसानों में बड़े पैमाने पर संक्रमण फैलाने के लिए जानी जाती हैं।
  • संक्रमण का प्रसार: यह वायरस जानवरों से इंसानों में और फिर संक्रमित या मृत व्यक्ति के शारीरिक तरल पदार्थों (bodily fluids) के सीधे संपर्क में आने से, या इन तरल पदार्थों से संक्रमित हुई सतहों व वस्तुओं के माध्यम से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैल सकता है।

Source: WHO

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