स्पेसएक्स रॉकेट का एक टुकड़ा चंद्रमा से टकराया

पिछले वर्ष से अंतरिक्ष में तैर रहा स्पेसएक्स (SpaceX) के रॉकेट का एक हिस्सा 5 अगस्त 2026 को अनजाने में तेज़ गति से चंद्रमा से टकरा गया। यह वस्तु स्कूल बस के आकार की थी और फाल्कन-9 (Falcon 9) रॉकेट का द्वितीय चरण (Second Stage) था, जिसने जनवरी 2025 में फायरफ्लाई एयरोस्पेस (Firefly Aerospace) के एक चंद्र लैंडर को प्रक्षेपित किया था।

यह लगभग पाँच मंज़िला इमारत जितनी ऊँची रॉकेट स्टेज उस मिशन का हिस्सा थी, जिसने अमेरिका और जापान के दो वाणिज्यिक चंद्र लैंडरों को चंद्रमा की ओर भेजा था।

यह रॉकेट अंतरिक्ष में क्यों रह गया?

सामान्यतः रॉकेट का दूसरा चरण अपने पेलोड (उपग्रह/अंतरिक्ष यान) को निर्धारित कक्षा में पहुँचाने के बाद पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश कर जल जाता है या समुद्र में गिर जाता है।

लेकिन जनवरी 2025 का चंद्र मिशन पृथ्वी की कक्षा वाले अभियानों की तुलना में अधिक ऊर्जा (थ्रस्ट) की मांग करता था। इसलिए फाल्कन-9 का दूसरा चरण पृथ्वी पर वापस नहीं लौट सका और अंतरिक्ष में ही निष्क्रिय अवस्था में तैरता रहा। यह उन हजारों अंतरिक्ष मलबों (Space Debris) में शामिल हो गया, जिनसे बचने के लिए सक्रिय उपग्रहों को अपनी कक्षा बदलनी पड़ती है।

इसी वर्ष की शुरुआत में खगोलविदों ने गणना की कि यह रॉकेट चरण, जिसका ईंधन समाप्त हो चुका था और जिसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता था, ऐसी कक्षा में पहुँच गया है जो अंततः चंद्रमा से टकराने वाली थी।

चंद्रमा पर अंतरिक्ष मलबे का टकराव

चंद्रमा पर अंतरिक्ष मलबे का टकराना बहुत दुर्लभ घटना है।

  • मार्च 2022 में चीन के एक रॉकेट का चरण चंद्र परीक्षण मिशन पूरा करने के बाद चंद्रमा से टकराया था।
  • 2009 में नासा (NASA) ने जानबूझकर एक रॉकेट चरण को चंद्रमा से टकराया था ताकि टकराव से उठने वाली चंद्र धूल और पदार्थ का अध्ययन किया जा सके।

चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हुए अन्य मिशन

हाल के वर्षों में कई चंद्र लैंडर, जो सुरक्षित (Soft Landing) उतरने के लिए भेजे गए थे, दुर्घटनाग्रस्त हो गए।

  • रूस का लूना-25 (Luna-25) मिशन 2023 में नियंत्रण खोने के बाद चंद्रमा पर गिर गया। इसके प्लूटोनियम-238 आधारित छोटे ऊर्जा स्रोत के चंद्र सतह पर बिना किसी विशेष खतरे के पड़े रहने की संभावना है।
  • भारत का चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) लैंडर 2019 में चंद्रमा पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
  • इज़राइल का बेरेशीट (Beresheet) लैंडर भी 2019 में दुर्घटनाग्रस्त हुआ। इसके पेलोड में टार्डीग्रेड (Tardigrades) नामक सूक्ष्म जीव भी थे, जो अत्यधिक विकिरण और कठोर परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता रखते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि वे अब भी चंद्र सतह पर मौजूद हो सकते हैं।

नासा के सैटर्न-V रॉकेट प्रयोग

1970 के दशक में नासा ने अपने सैटर्न-V (Saturn V) चंद्र रॉकेट के कई चरणों को जानबूझकर चंद्रमा से टकराया था, ताकि इन टक्करों से उत्पन्न भूकंपीय (Seismic) प्रभावों का अध्ययन किया जा सके।

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