छोटे घड़ियाल का दिखना असम के नदी इकोसिस्टम के पुनरुद्धार का संकेत है: CM हिमंत सरमा

असम के पश्चिम कार्बी आंगलोंग जिले की केकैडोंग नदी में एक छोटे (किशोर) घड़ियाल के देखे जाने से पर्यावरणविदों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी उत्साह है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस खोज का स्वागत करते हुए इसे राज्य के सुधरते हुए नदीय पारितंत्र और जैव विविधता संरक्षण के चल रहे प्रयासों का एक बेहद महत्वपूर्ण और सकारात्मक संकेतक बताया है।

दुनिया की सबसे संकटापन्न प्रजातियों में से एक

घड़ियाल (Gavialis gangeticus) दुनिया की सबसे गंभीर संकटापन्न (Critically Endangered) मगरमच्छ प्रजातियों में से एक है। अपनी लंबी, संकरी थूथन के लिए पहचाने जाने वाले घड़ियाल पूरी तरह से साफ और स्वतंत्र रूप से बहने वाली नदियों पर निर्भर होते हैं। पिछले कुछ दशकों में पर्यावास स्थान के क्षरण, अवैध रेत खनन, नदी प्रदूषण, बांधों के निर्माण और मछलियों की घटती आबादी के कारण भारतीय उपमहाद्वीप में इनकी संख्या में भारी गिरावट आई है।

घड़ियाल के बारे में

  • नाम की उत्पत्ति: घड़ियाल का नाम भारतीय शब्द ‘घड़ा’ (मिट्टी का बर्तन) से लिया गया है। ऐसा नर घड़ियाल की थूथन (Snout) के सिरे पर मौजूद एक गोल उभार (Bulbous Knob) के कारण है, जो बिल्कुल घड़े जैसा दिखता है।
  • नर और मादा में स्पष्ट अंतर: इस ‘घड़े’ की वजह से ही घड़ियाल दुनिया की इकलौती मगरमच्छ प्रजाति है जिसमें नर और मादा को केवल देखकर ही अलग पहचाना जा सकता है (यौन द्विरूपता/Sexually Dimorphic)।
  • प्रजनन और लिंग निर्धारण: अन्य मगरमच्छों की तरह घड़ियाल भी बहुविवाही (Polygamous) होते हैं, जहाँ एक नर अपने क्षेत्र की रक्षा करता है और उसमें कई मादाओं के साथ रहता है। अन्य रेंगने वाले जीवों की तरह इनके संतानों का लिंग (Sex) भी अंडों के सेने (Incubation) के दौरान तापमान से तय होता है।

अब केवल भारत और नेपाल में ही बचे हैं घड़ियाल

वर्तमान में यह दुर्लभ जीव केवल भारत और नेपाल के जल क्षेत्रों में ही जीवित बचा है। भारत में इनकी जीवित आबादी मुख्य रूप से गंगा नदी प्रणाली की सहायक नदियों में पाई जाती है:

  • गिरवा (उत्तर प्रदेश)
  • सोन (मध्य प्रदेश)
  • रामगंगा (उत्तराखंड)
  • गंडक (बिहार)
  • चंबल (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान)
  • महानदी (ओडिशा)

संरक्षण की स्थिति: भारत में घड़ियालों की लगभग 90% आबादी अकेले ‘राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य’ (National Chambal Sanctuary) में पाई जाती है। घड़ियाल को अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की रेड लिस्ट में ‘गंभीर रूप से संकटग्रस्त’ (Critically Endangered – CR) श्रेणी में सूचीबद्ध किया गया है। 

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