भारत और फ्रांस 2027 में ‘तृष्णा’ सैटेलाइट लॉन्च करेंगे: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत और फ्रांस वर्ष 2027 में संयुक्त रूप से ‘तृष्णा’ (TRISHNA) उपग्रह लॉन्च करेंगे, जिसका उद्देश्य वैश्विक जल और खाद्य सुरक्षा में योगदान देना है। फ्रांस और स्लोवाकिया की अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव के दौरान पेरिस में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह उपग्रह परियोजना पिछले साल पेरिस में और इस साल दिल्ली में सह-आयोजित ‘एआई शिखर सम्मेलनों’ (AI Summits) में प्रदर्शित सहयोग का ही एक स्वाभाविक विस्तार है।
इसरो और CNES का सहयोगात्मक प्रयास
तृष्णा (Thermal Infra-Red Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment – TRISHNA) मिशन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) के बीच एक सहयोगात्मक प्रयास है। इसरो के अनुसार, इस मिशन को क्षेत्रीय से लेकर वैश्विक स्तर पर ‘सतह ऊर्जा बजटिंग’ (surface energy budgeting) के लिए पृथ्वी की सतह के तापमान, उत्सर्जन (emissivity), जैव-भौतिकीय और विकिरण चरों (biophysical and radiation variables) की उच्च स्थानिक (spatial) और उच्च कालिक (temporal) रिज़ॉल्यूशन निगरानी प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।
जल और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियां
यह मिशन मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और ‘इवैपोट्रांसपिरेशन’ (वाष्पीकरण-उत्सर्जन) निगरानी के माध्यम से जल संसाधन के दक्ष प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हुए, जल और खाद्य सुरक्षा की गंभीर चुनौतियों का समाधान करता है।
तृष्णा मिशन के मुख्य उद्देश्य
तृष्णा के प्राथमिक उद्देश्यों में शामिल हैं:
- स्थलीय जल तनाव (terrestrial water stress) और पानी के उपयोग की मात्रा निर्धारित करने के लिए महाद्वीपीय बायोस्फीयर के ऊर्जा और जल बजट की विस्तृत निगरानी करना।
- तटीय और अंतर्देशीय जल (coastal and inland waters) में पानी की गुणवत्ता और गतिशीलता का उच्च-रिज़ॉल्यूशन अवलोकन करना।
उपग्रह के प्राथमिक पेलोड
तृष्णा उपग्रह दो प्राथमिक पेलोड से लैस है:
- थर्मल इन्फ्रा-रेड (TIR) पेलोड: इसे फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसी CNES द्वारा प्रदान किया गया है।
- विजिबल – नियर इन्फ्रा-रेड – शॉर्ट वेव इन्फ्रा-रेड (VNIR-SWIR) पेलोड: इसे भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी ISRO द्वारा विकसित किया गया है।



