चक्रवात की वजह से ‘तपानुली ओरांगुटान’ की संख्या में गिरावट
‘करंट बायोलॉजी’ (Current Biology) जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन ने दुनिया भर के पर्यावरणविदों को चिंता में डाल दिया है। अध्ययन के अनुसार, पिछले साल (नवंबर 2025) महज चार दिनों के भीतर जलवायु परिवर्तन जनित एक चक्रवात ने दुनिया के सबसे दुर्लभ ग्रेट एप्स— तपानुली ओरांगुटान (Pongo tapanuliensis) की कुल आबादी का 7 प्रतिशत हिस्सा खत्म कर दिया।
घटना का विवरण
- प्रभाव: नवंबर 2025 में आए इस विनाशकारी उष्णकटिबंधीय चक्रवात के कारण हुई भारी बारिश और भूस्खलन (landslides) ने इंडोनेशिया के उत्तरी सुमात्रा में स्थित ‘बतांग तोरु’ (Batang Toru) जंगल के पश्चिमी ब्लॉक को बुरी तरह प्रभावित किया।
- जान-माल की क्षति: इस प्राकृतिक आपदा में लगभग 58 तपानुली ओरांगुटान मारे गए।
तपानुली ओरांगुटान के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य
- अति दुर्लभ प्रजाति: तपानुली ओरांगुटान को 2017 में एक नई प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया था। ये बोर्नियन (P. pygmaeus) और सुमात्रन (P. abelii) ओरांगुटान से भिन्न हैं और वर्तमान में दुनिया के सबसे दुर्लभ ग्रेट एप माने जाते हैं।
- संकटपूर्ण स्थिति: 2019 की गणना के अनुसार, इनकी पूरी प्रजाति में केवल 767 सदस्य ही बचे थे, जिनमें से 581 सदस्य उसी पश्चिमी ब्लॉक में रहते थे जहाँ चक्रवात ने तबाही मचाई।
ये प्रजाति इतनी असुरक्षित क्यों है?
अध्ययन में तपानुली ओरांगुटान की भेद्यता के तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं:
- धीमी प्रजनन दर: इनका प्रजनन चक्र बहुत धीमा होता है; ये लगभग हर छह से नौ साल के अंतराल पर ही एक बच्चे को जन्म देते हैं।
- पर्यावास पर निर्भरता: ये ओरांगुटान जीवित रहने के लिए पूरी तरह से पेड़ों के कवर (tree cover) पर निर्भर हैं। पर्यावास विनाश (habitat destruction) पहले ही इन्हें विलुप्ति की कगार पर धकेल चुका था।
- पर्यावरणीय झटके: पर्यावास के नष्ट होने और सीमित संख्या के कारण, जलवायु परिवर्तन से पैदा होने वाली ऐसी आपदाएं अब इनके अस्तित्व के लिए सीधे और विनाशकारी खतरे बन गई हैं।


