तेलंगाना में पैराक्वाट पर 60 दिनों का प्रतिबंध

तेलंगाना सरकार ने ‘कीटनाशक अधिनियम’ (Insecticides Act) के तहत पैराक्वाट (Paraquat) खरपतवारनाशी/ शाकनाशी (हर्बीसाइड) की बिक्री, उपयोग और वितरण पर 60 दिनों का प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। सरकार ने यह कदम मानव और पशु स्वास्थ्य के प्रति उत्पन्न गंभीर जोखिमों को देखते हुए उठाया है। गौरतलब है कि ओडिशा ने भी 2023 में इसी तरह का कदम उठाया था।

पैराक्वाट: स्वास्थ्य के लिए जानलेवा खतरा

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, पैराक्वाट कृषि में उपयोग किए जाने वाले सबसे घातक शाकनाशियों में से एक है। इसकी भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि:

  • कोई मारक (Antidote) नहीं: दुनिया में कहीं भी इसका कोई इलाज या एंटीडोट उपलब्ध नहीं है।
  • अत्यधिक घातक: इसकी बहुत कम मात्रा भी जानलेवा साबित हो सकती है।
  • अंगों को गंभीर क्षति: यह रसायन फेफड़ों, किडनी और लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचाता है, जिससे अक्सर ‘मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर’ (अंगों का काम करना बंद कर देना) की स्थिति पैदा हो जाती है।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंध की तैयारी

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार भी ‘पैराक्वाट डाइक्लोराइड’ (Paraquat Dichloride) पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है। एक विशेषज्ञ समिति ने साक्ष्यों की समीक्षा की है, जिसमें इसे घातक विषाक्तता, किडनी फेल्योर, फेफड़ों में फाइब्रोसिस और पार्किंसंस रोग (Parkinson’s disease) से जोड़ा गया है।

यदि यह प्रतिबंध लागू होता है, तो यह देश के उस विशाल एग्रोकेमिकल बाजार को प्रभावित करेगा, जिसमें 1,500 से अधिक लाइसेंसधारक शामिल हैं।

खेती में पैराक्वाट का व्यापक उपयोग

भारत में पैराक्वाट के व्यापक उपयोग के मुख्य कारण इसकी कम लागत और तेजी से काम करने की क्षमता है। यह एक गैर-चयनात्मक शाकनाशी (non-selective herbicide) के रूप में निम्नलिखित क्षेत्रों में इस्तेमाल होता है:

  • प्रमुख फसलें: चाय, रबर, कॉफी, कपास, धान, गेहूं, मक्का, आलू, अंगूर और सेब।
  • अन्य उपयोग: नहरों, तालाबों और जलमार्गों में खरपतवार नियंत्रण के लिए।
error: Content is protected !!