BIS ने सामुदायिक बीज बैंकों के लिए नया मानक IS 20201:2026 जारी किया

उपभोक्ता मामले विभाग के अंतर्गत भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने एक नया भारतीय मानक, IS 20201:2026 जारी किया है। इसका उद्देश्य सामुदायिक बीज बैंकों (Community Seed Banks – CSBs) के प्रबंधन को मजबूत करना और देश भर में स्वदेशी फसल किस्मों के संरक्षण को बढ़ावा देना है।

मानक की मुख्य विशेषताएं:

  • उद्देश्य: यह मानक सामुदायिक नेतृत्व वाले और विकेंद्रीकृत बीज बैंकों के लिए मानकीकृत दिशा-निर्देश प्रदान करता है। इससे किसानों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल गुणवत्तापूर्ण बीज इकट्ठा करने, संग्रहीत करने, बनाए रखने और उनका आदान-प्रदान करने में मदद मिलेगी।
  • विकास: इसे BIS के पर्यावरण और पारिस्थितिकी विभाग के अंतर्गत ‘जैव विविधता अनुभागीय समिति’ (Biodiversity Sectional Committee) द्वारा विकसित किया गया है।
  • कृषि में महत्व: यह ढांचा कृषि जैव विविधता के संरक्षण का समर्थन करेगा और कृषक समुदायों की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा।
  • प्रकृति: यह मानक स्वैच्छिक (voluntary) और प्रमाणन योग्य (certifiable) है।

सरकारी पहलों के साथ समन्वय:

यह नया मानक सरकार के सतत कृषि को बढ़ावा देने के प्रयासों के अनुरूप है और निम्नलिखित मौजूदा पहलों का पूरक है:

  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा और पोषण मिशन (NFSNM): जो सामुदायिक बीज बैंक स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
  • पौध किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 (Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights Act, 2001)।
  • जैविक विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002)।

उपलब्धता:

BIS ने IS 20201:2026 को अपने आधिकारिक पोर्टल पर निःशुल्क उपलब्ध कराया है। ब्यूरो ने सामुदायिक बीज बैंकों, सहकारी समितियों और कृषि क्षेत्र के अन्य हितधारकों से इन दिशा-निर्देशों को अपनाने का आग्रह किया है।

नोट: भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की स्थापना BIS अधिनियम, 2016 के तहत की गई थी और यह भारत का राष्ट्रीय मानक निकाय है, जो विभिन्न क्षेत्रों में गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली के विकास के लिए जिम्मेदार है।

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