WHO ने कांगो और युगांडा में इबोला के प्रकोप को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का आपातकाल’ घोषित किया
कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अंतर्राष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित कर दिया गया है, क्योंकि इस बीमारी के कारण अब तक 80 मौतें हो चुकी हैं। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि बुंडिबुग्यो वायरस (Bundibugyo virus) के कारण फैला यह प्रकोप हालांकि एक महामारी (pandemic) आपातकाल के मानदंडों को पूरा नहीं करता है, लेकिन इस बीमारी के डीआरसी के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों में आगे फैलने का उच्च जोखिम है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, देश का यह 17वां प्रकोप वास्तव में बहुत बड़ा हो सकता है, क्योंकि शुरुआती नमूनों में संक्रमण की दर (positivity rate) काफी उच्च है और संदिग्ध मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
इबोला बीमारी के बारे में मुख्य तथ्य
- परिभाषा और कारण: इबोला बीमारी (EBOD) मनुष्यों में होने वाली एक दुर्लभ लेकिन गंभीर बीमारी है, जो अक्सर घातक होती है। यह ‘फिलोविरीडे’ (filoviridae) परिवार के ‘ऑर्थोइबोलावायरस’ (Orthoebolavirus) जीनस से संबंधित वायरस के कारण होती है।
- वायरस की प्रजातियां: आज तक ऑर्थोइबोलावायरस की छह प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से तीन बड़े पैमाने पर प्रकोप पैदा करने के लिए जानी जाती हैं:
- इबोला वायरस (EBOV): इसके कारण इबोला वायरस रोग (EVD) होता है।
- सूडान वायरस (SUDV): इसके कारण सूडान वायरस रोग (SVD) होता है।
- बुंडिबुग्यो वायरस (BDBV): इसके कारण बुंडिबुग्यो वायरस रोग (BVD) होता है।
- इतिहास और नामकरण: इबोला बीमारी पहली बार 1976 में दो समवर्ती (simultaneous) प्रकोपों के रूप में सामने आई थी। पहला प्रकोप सूडान वायरस रोग का था जो नज़ारा (अब दक्षिण सूडान) में हुआ था, और दूसरा प्रकोप इबोला वायरस रोग का था जो याम्बुकु (अब कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य) में हुआ था। याम्बुकु वाला प्रकोप इबोला नदी के पास एक गाँव में हुआ था, जिसके नाम पर इस बीमारी का नाम रखा गया।
- टीके और उपचार की स्थिति: हालांकि इबोला वायरस रोग (EVD) के लिए लाइसेंस प्राप्त टीके और उपचार उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य इबोला बीमारियों—जैसे कि SVD या BVD—के लिए वर्तमान में कोई स्वीकृत टीका या उपचार नहीं है। इनके लिए संभावित उत्पादों (candidate products) का विकास किया जा रहा है।
संचरण (Transmission) के कारण और माध्यम
- प्राकृतिक होस्ट: माना जाता है कि ‘टेरोपोडिडे’ (Pteropodidae) परिवार के चमगादड़ (fruit bats) ऑर्थोइबोलावायरस के प्राकृतिक मेजबान हैं।
- जानवरों से मनुष्यों में प्रसार: यह वायरस मानव आबादी में तब प्रवेश करता है जब लोग संक्रमित जानवरों—जैसे कि चमगादड़, चिंपांज़ी, गोरिल्ला, बंदर, जंगली हिरण या साही (porcupines)—जो वर्षावनों में बीमार या मृत पाए जाते हैं, उनके रक्त, स्राव (secretions), अंगों या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आते हैं।
मनुष्यों से मनुष्यों में प्रसार: लोग सीधे संपर्क के माध्यम से एक दूसरे से इस वायरस से संक्रमित हो सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि लक्षण दिखाई देने से पहले लोग इस बीमारी को प्रसारित नहीं कर सकते हैं, और वे तब तक संक्रामक बने रहते हैं जब तक उनके रक्त में यह वायरस मौजूद रहता है।


