रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 मई को गोथेनबर्ग में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जिसमें दोनों देश अपने संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक ले जाने पर सहमत हुए। इसका उद्देश्य व्यापार, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और स्थिरता के क्षेत्रों में सहयोग को और अधिक गहरा करना है। दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि नई रणनीतिक साझेदारी चार प्रमुख स्तंभों द्वारा निर्देशित होगी — स्थिरता और सुरक्षा के लिए रणनीतिक संवाद; अगली पीढ़ी की आर्थिक साझेदारी; उभरती प्रौद्योगिकियां और विश्वसनीय कनेक्टिविटी; तथा मिलकर कल को आकार देना – लोग, ग्रह, स्वास्थ्य और लचीलापन।
इसके अतिरिक्त, दोनों देशों ने राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी, सुरक्षा और लोगों से लोगों के बीच (people-to-people) के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने के उद्देश्य से ‘भारत-स्वीडन संयुक्त कार्य योजना 2026-2030’ (India-Sweden Joint Action Plan 2026-2030) को अपनाया।
रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वीडन के ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया, जो इस स्कैंडिनेवियाई देश द्वारा किसी शासनाध्यक्ष (Head of Government) को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। यह प्रधानमंत्री मोदी का 31वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मान है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार की स्थापना 1748 में की गई थी और इसका उद्देश्य स्वीडन या स्वीडिश हितों के लिए किए गए व्यक्तिगत प्रयासों, विशेष रूप से सार्वजनिक गतिविधियों के भीतर, साथ ही सार्वजनिक कार्यों और कर्तव्यों के सफल संपादन को मान्यता देना है।
ग्रिपेन लड़ाकू विमान
प्रधानमंत्री का विमान गोथेनबर्ग (Gothenburg) में उतरने से पहले, जैसे ही पीएम मोदी के विमान ने स्वीडिश हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया, ग्रिपेन (Gripen) लड़ाकू विमानों द्वारा उसे एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरा प्रदान) किया गया। ग्रिपेन लड़ाकू विमानों को भविष्य के उन्नत खतरों का मुकाबला करने और उन्हें हराने के लिए विकसित किया गया है। इसमें उच्च उत्तरजीविता (high survivability) के लिए स्फेरिकल कवरेज (गोलाकार कवरेज) वाला एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तंत्र और नवीनतम एईएसए (AESA) तकनीक मौजूद है।


