RBI ने बैंकों के लिए पूंजी पर्याप्तता मानदंडों (CRAR) में संशोधन किया
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंकों की कोर कैपिटल (मुख्य पूंजी) की गणना में तिमाही मुनाफे (quarterly profits) को शामिल करने से जुड़े दिशानिर्देशों में संशोधन किया है। इसके तहत गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) के लिए प्रोविजनिंग (प्रावधान) से जुड़ी एक पुरानी शर्त को हटा दिया गया है।
आरबीआई ने एक बयान में कहा कि उसने ‘कैपिटल टू रिस्क वेटेड एसेट्स रेशियो’ (CRAR) की गणना के लिए ‘कॉमन इक्विटी टियर 1’ (CET1) पूंजी में तिमाही मुनाफे को शामिल करने के संबंध में 8 अप्रैल, 2026 को जारी मसौदा प्रस्तावों पर मिले फीडबैक की समीक्षा करने के बाद यह संशोधन जारी किया है।
यह नया ढांचा वाणिज्यिक बैंकों (commercial banks), स्मॉल फाइनेंस बैंकों (small finance banks) और पेमेंट बैंकों (payments banks) पर तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
संशोधित नियम के मुख्य बिंदु
- नया नियम: अब बैंक अपनी CET1 पूंजी की गणना में तिमाही मुनाफे को शामिल कर सकते हैं, बशर्ते उनके वित्तीय विवरणों (financial statements) का हर तिमाही में ऑडिट किया गया हो या उनकी ‘सीमित समीक्षा’ (limited review) की गई हो।
- गणना का फॉर्मूला: शामिल की जाने वाली पात्र राशि का निर्धारण एक विशेष फॉर्मूले के जरिए किया जाएगा, जो पिछले तीन वित्तीय वर्षों के शुद्ध लाभ (net profit) और औसत लाभांश भुगतान (average dividend payout) से जुड़ा होगा।
कॉमन इक्विटी टियर 1 कैपिटल (CET1)
यह विनियामक पूंजी (regulatory capital) की सबसे सुरक्षित और उच्चतम गुणवत्ता वाली श्रेणी है, क्योंकि यह बैंकों को होने वाले नुकसान को तुरंत अवशोषित (absorb) कर लेती है।
- महत्व: बासेल III (Basel III) नियमों के तहत, यह संकट के समय वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक मुख्य बफर के रूप में कार्य करता है।
- न्यूनतम आवश्यकता: आमतौर पर जोखिम-भारित संपत्तियों (risk-weighted assets) का 4.5% से 6% होना अनिवार्य है।
- CET1 के मुख्य घटक:
- सामान्य शेयर (या गैर-संयुक्त स्टॉक कंपनियों के लिए इसके समकक्ष मूल्य) और स्टॉक सरप्लस
- प्रतिधारित कमाई (Retained earnings)
- अन्य व्यापक आय (Other comprehensive income)
- क्वालिफाइंग माइनॉरिटी इंटरेस्ट और रेगुलेटरी एडजस्टमेंट (नियामक समायोजन)
जोखिम-भारित संपत्ति अनुपात (CRAR या CAR)
यह किसी बैंक की वित्तीय मजबूती और संभावित नुकसान को झेलने की क्षमता को मापने का एक प्रमुख संकेतक है। CRAR में दो तरह की पूंजी शामिल होती है: टियर 1 (Tier 1) और टियर 2 (Tier 2) पूंजी।
- वैश्विक मानक (बासेल III): बैंकों के लिए न्यूनतम 8% का CRAR या CAR बनाए रखना अनिवार्य है।
भारत में कड़ा मानक (RBI नियम): भारत में, रिजर्व बैंक अधिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 9% का सख्त बेंचमार्क लागू करता है, ताकि बैंकिंग क्षेत्र में तनावग्रस्त संपत्तियों (stressed assets) के जोखिम से निपटने के लिए बैंकों के पास अतिरिक्त सुरक्षा कवच (extra cushion) मौजूद रहे।


