विरली खांदर महापाषाण कालीन स्थल
महाराष्ट्र के विरली खांदर (Virli Khandar) में एक महापाषाण कालीन स्थल (megalithic site) पर चल रही खुदाई ने प्राचीन विदर्भ की अंत्येष्टि प्रथाओं (funerary practices) के बारे में नई और महत्वपूर्ण जानकारियाँ उजागर की हैं।
भंडारा जिले की पवनी तहसील में स्थित इस स्थल की रिपोर्ट पहली बार 2008 में राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (RTMNU) के शोधकर्ताओं द्वारा दी गई थी। वर्तमान में यह खुदाई आरटीएमएनयू (RTMNU) के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व विभाग के प्रमुख डॉ. प्रभाष साहू के नेतृत्व में की जा रही है।
उत्खनन की मुख्य विशेषताएँ:
- मैपिंग और सर्वेक्षण: शोधकर्ताओं ने ड्रोन मैपिंग और फील्ड सर्वे के माध्यम से अब तक 69 महापाषाण कालीन शवाधानों (burials) को रिकॉर्ड किया है।
- शवाधान संरचना: खुदाई के लिए चार शवाधान स्थलों का चयन किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
- दो ऐसे पत्थर के घेरे (stone circles) जिनकी परिधि में ‘मेनहिर’ (menhir – ऊर्ध्वाधर खड़े पत्थर) और बड़े पत्थर (boulders) हैं।
- दो ऐसे घेरे जिनमें केवल बड़े पत्थर (boulder circles) हैं।
- अद्वितीय मृदभांड: सबसे चौंकाने वाली खोज मिट्टी के बर्तनों का एक अनूठा समूह है, जो विदर्भ क्षेत्र में पहले कभी नहीं देखा गया। एक कब्र में लगभग 50 बर्तन व्यवस्थित तरीके से रखे हुए पाए गए, जिनमें बड़े कटोरे उल्टे कटोरे से ढके हुए थे।
सांस्कृतिक अंतर्दृष्टि: पुरातत्वविदों का मानना है कि ये बर्तन मूल रूप से अंत्येष्टि भेंट के रूप में भोजन, अनाज या तरल पदार्थों से भरे रहे होंगे। इनके भीतर क्या था, यह जानने के लिए अवशेषों का रासायनिक विश्लेषण किया जा रहा है।


