भारत जामुन के विकास के उद्गम स्थल के रूप में उभरा

एक नए अध्ययन के अनुसार, यह पाया गया है कि जामुन (Syzygium) की उत्पत्ति पहले के अनुमानों की तुलना में बहुत पहले हुई थी, और इसके विकासवादी इतिहास में भारत ने एक केंद्रीय भूमिका निभाई है।

अध्ययन के मुख्य बिंदु:

  • गोंडवाना मूल: यह अध्ययन Syzygium प्रजाति की उत्पत्ति पूर्वी गोंडवाना (East Gondwanan) में लगभग 8 करोड़ साल पहले होने की ओर इशारा करता है।
  • भारत-केंद्रित विकास: भारत इस प्रजाति के शुरुआती विविधीकरण (diversification) का एक प्रमुख केंद्र रहा है, जो पौधों के विकास के बारे में हमारी समझ को नया रूप देता है।
  • पुरानी धारणाओं में बदलाव: पहले जामुन की उत्पत्ति केवल ऑस्ट्रेलिया या दक्षिण-पूर्व एशिया तक सीमित मानी जाती थी। पूर्व में इसके 5.1 करोड़ साल पुराने होने का अनुमान लगाया गया था, लेकिन शोधकर्ताओं ने जीवाश्म साक्ष्यों और आणविक समयसीमाओं के बीच विसंगतियां पाईं।

महत्वपूर्ण खोज और जीवाश्म साक्ष्य:

  • बी.एस.आई.पी. (BSIP) का नेतृत्व: बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (Birbal Sahni Institute of Palaeosciences) के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश की कसौली संरचना (Kasauli Formation) से लगभग 2 करोड़ साल पुराने (अर्ली मायोसीन) जीवाश्म नमूने एकत्र किए।
  • नया जीवाश्म: भारत के इन निक्षेपों से Syzygium के 11 अच्छी तरह से संरक्षित जीवाश्म पत्ते मिले, जिन्हें Syzygium paleosalicifolium नाम दिया गया है।
  • प्राचीन उपस्थिति: भारत के पुराने जीवाश्म रिकॉर्ड की पुन: जांच से संकेत मिलता है कि यह प्रजाति अर्ली इओसीन (5.5 करोड़ साल पहले) से ही भारतीय क्षेत्र में मौजूद थी।

निष्कर्ष:

यह शोध साबित करता है कि भारत में इस प्रजाति की उपस्थिति बहुत पुरानी और निरंतर रही है। ऐसा माना जाता है कि यहीं से यह प्रजाति दक्षिण-पूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया में फैली, जिससे इस पारिस्थितिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधे के भौगोलिक इतिहास की नई परिभाषा सामने आई है।

error: Content is protected !!