9वें हिंद महासागर सम्मेलन (IOC 2026)
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 10-12 अप्रैल तक पोर्ट लुई, मॉरीशस में आयोजित 9वें हिंद महासागर सम्मेलन (IOC 2026) के इतर कई देशों के नेताओं के साथ उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें कीं।
मुख्य अंश (Key Highlights)
- चोकपॉइंट्स (Chokepoints) पर बढ़ती चिंता: डॉ. जयशंकर ने रेखांकित किया कि समुद्री चोकपॉइंट्स—जैसे जलडमरूमध्य और नहरें—वैश्विक चिंता का एक बड़ा कारण बन गए हैं। ये मार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन व्यवधानों के प्रति संवेदनशील हैं, जिससे दुनिया भर में आर्थिक और सुरक्षा स्थिरता प्रभावित होती है।
- ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ के रूप में भारत: क्षेत्रीय भूमिका की पुष्टि करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में लगातार ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ के रूप में कार्य किया है। मानवीय संकटों से लेकर प्राकृतिक आपदाओं तक, भारत ने त्वरित और विश्वसनीय सहायता प्रदान की है।
- श्रीलंका, मेडागास्कर और मोजाम्बिक जैसे देशों में आपदा राहत अभियान।
- मॉरीशस और श्रीलंका के तटों पर तेल रिसाव (Oil Spills) के प्रति त्वरित प्रतिक्रिया।
- ‘ऑपरेशन सागरबंधु’: चक्रवात ‘दितवा’ के बाद श्रीलंका में मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) प्रयासों के तहत 450 मिलियन अमेरिकी डॉलर का सहायता पैकेज।
कनेक्टिविटी और विकास पर ध्यान: विदेश मंत्री ने जोर दिया कि क्षेत्रीय एकीकरण के लिए कनेक्टिविटी पहल केंद्रीय हैं। उन्होंने ऐसी परियोजनाओं का आह्वान किया जो:
- पारदर्शी हों।
- संप्रभुता का सम्मान करने वाली हों।
- सच्ची साझेदारी पर आधारित हों।
उन्होंने हिंद महासागर को “ग्लोबल साउथ का महासागर” बताते हुए पूरे ग्लोबल साउथ में स्थायी विकास और क्षमता निर्माण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
सम्मेलन का विषय और सहभागिता
- विषय (Theme): “हिंद महासागर शासन के लिए सामूहिक नेतृत्व” (Collective Stewardship for Indian Ocean Governance)।
- आयोजक: इंडिया फाउंडेशन द्वारा मॉरीशस सरकार के सहयोग से।
हिंद महासागर सम्मेलन (IOC) के बारे में
इस सम्मेलन की शुरुआत 2016 में इंडिया फाउंडेशन द्वारा क्षेत्र के थिंक टैंकों और संस्थानों के सहयोग से की गई थी। यह सम्मेलन अब 30 से अधिक देशों की भागीदारी के साथ एक प्रमुख क्षेत्रीय मंच के रूप में विकसित हो गया है, जो समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और हिंद महासागर के स्थायी शासन पर केंद्रित है।


