राज्यसभा के कई सदस्यों ने सदन में अपने गैर-सरकारी विधेयक पेश किए
राज्यसभा के कई सदस्यों ने 13 मार्च को सदन में अपने गैर-सरकारी विधेयक (Private Members’ Bills) पेश किए। जब दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो उच्च सदन ने निजी सदस्यों के संकल्पों पर विचार किया। भाजपा सांसद धनंजय भीमराव महाडिक ने ‘कोल्हापुरी लेदर क्राफ्ट (संरक्षण और आजीविका सुरक्षा) विधेयक, 2026’ पेश किया, और कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने ‘जलवायु अनुकूल कृषि और किसान संरक्षण विधेयक, 2025’ पेश किया। सदन में एक अन्य गैर-सरकारी विधेयक – ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण विधेयक 2024’ पर भी चर्चा हुई।
गैर-सरकारी विधेयक: मुख्य तथ्य
- परिभाषा: कानून बनाने की प्रक्रिया संसद के किसी भी सदन में विधेयक पेश करने के साथ शुरू होती है। यदि विधेयक किसी मंत्री द्वारा पेश किया जाता है, तो इसे सरकारी विधेयक (Government Bill) कहा जाता है। यदि इसे मंत्री के अलावा किसी अन्य सदस्य द्वारा पेश किया जाता है, तो इसे गैर-सरकारी विधेयक (Private Member’s Bill) कहा जाता है।
- समय का आवंटन: राज्यसभा, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में प्रत्येक सप्ताह का एक विशेष दिन गैर-सरकारी विधायी कार्यों के लिए आवंटित किया जाता है। आमतौर पर सत्र के दौरान प्रत्येक वैकल्पिक शुक्रवार (alternate Friday) को दोपहर 2.30 बजे से शाम 5.00 बजे तक (ढाई घंटे) का समय इसके लिए निर्धारित होता है।
- नोटिस की अवधि: विधेयक पेश करने के इच्छुक किसी भी गैर-मंत्री सदस्य को कम से कम एक महीने का नोटिस देना आवश्यक है, जब तक कि सभापति कम समय के नोटिस पर इसकी अनुमति न दें।
- स्वीकार्यता (Admissibility): राज्यसभा में विधेयक की स्वीकार्यता का निर्णय सभापति (Chairman) द्वारा किया जाता है, जबकि लोकसभा में यह निर्णय अध्यक्ष (Speaker) द्वारा लिया जाता है।
- प्रक्रिया: जिस सदस्य ने नोटिस दिया है, वह आमतौर पर अपनी ओर से किसी अन्य सदस्य को विधेयक पेश करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।
- ऐतिहासिक महत्व: अब तक केवल 14 गैर-सरकारी विधेयक ही कानून बन पाए हैं, जिनमें से 5 राज्यसभा में पेश किए गए थे। संख्या कम होने के बावजूद, विधायी विमर्श में इनका प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
Source: AIR & SANSAD


